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भगवान ब्रम्हा की तपोभूमि ब्राम्हण घाट में मौनी अमावस्या पर लगायी पुण्य की डुबकी : श्रद्धालुओं का लगा तांता

नरसिंहपुर यशभारत। भगवान ब्रम्हा की तपोभूमि ब्राम्हण घाट में मौनी अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालुओं ने पहुंचकर पुण्य की डुबकी लगायी। अमावस्या को देखते हुए एक दिन पूर्व से ही श्रद्धालुओं बरमान घाट पहुंचना प्रारंभ हो गया था और अमावस्या के दिन श्रद्धालुओं ने पुण्य स्नान किया। जिले सहित आसपास के पड़ौसी जिलों से भी काफी संख्या में श्रद्धालुगण पहुंचे। भक्तों ने पुण्य स्नान कर पूजा अर्चना की व सुख समृद्धि का माँ रेवा से आर्शीवाद मांगा।

श्रद्धालुओं ने ऐतिहासिक बरमान मेले का भी जमकर लुत्फ उठाया। बरमान मेला की कीर्ति दूर-दूर तक फैली है। यहाँ महाकौशल, विंध्य व बुंदेलखंड के अलावा महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश आदि अन्य राज्यों से आए लोग मौजूदगी दर्ज कराते हैं। नर्मदा किनारे बरमान के मेले तले विभिन्न पृष्ठभूमियों और रीति-रीवाज से जुड़े लोगों का संगम करीब एक महीने तक चलता है। नदियों के किनारे पैदा हुई मेला संस्कृति ने कई परंपराओं व मान्यताओं को हमेशा ही पोषित किया है।

 

नरसिंहपुर जिले का बरमान मेला भी मूल्यों व परंपरा संग सदियों का सफर पूरा कर चुका है। जानकारी के अनुसार यहाँ आज भी 12वीं सदी की वराह प्रतिमा और रानी दुर्गावती द्वारा ताजमहल की आकृति का बनाया मंदिर मौजूद है। इसके अलावा, यहाँ स्थित 17 वीं शताब्दी का राम-जानकी मंदिर, 18वीं शताब्दी का हाथी दरवाजा, छोटा खजुराहो के रूप में ख्यात सोमेश्वर मंदिर, गरुड़ स्तंभ, पांडव कुंड, ब्रह्म कुंड, सतधारा, दीपेश्वर मंदिर, शारदा मंदिर व लक्ष्मीनारायण मंदिर इतिहास का जीवंत दस्तावेज हैं।

 

बरमान मेले का महत्व नर्मदा नदी की वजह से भी है। स्कंद पुराण में उल्लेख है कि ब्रह्मा ने नर्मदा तट के सौंदर्य से अभिभूत होकर यहाँ तप किया, इस वजह से ब्रह्मांड घाट कहलाया। कालांतर में ब्रह्मांड घाट का अपभ्रंश बरमान हो गया। यहाँ के पांडव कुंड के बारे में कहा जाता है कि वनवास के समय जब यहाँ पांडव ठहरे तो उन्होंने एक कुंड में नर्मदा का जल लाने का प्रयास किया, वह पांडव कुंड बन गया। पास में ही पांडव गुफाएँ हैं। वहीं सूर्य कुंड व ब्रह्म कुंड के बारे में मान्यता है कि इसमें स्नान करने से कुष्ठ रोग, चर्म रोग व मिर्गी दूर होती है।

नर्मदा तटों पर रही अत्याधिक भीड़

वैसे तो हर दिन नर्मदा तटों पर श्रद्धालुओं का आना होता है, परंतु विशेष मौकों पर यहां श्रद्धालुओं की अपार भीड़ देखी जाती है। बरमान घाट सहित सांकल घाट, पिपरिया, घाट, शगुन घाट, झांसी घाट, ककरा घाट सहित माँ नर्मदा के विभिन्न तटों पर श्रद्धालुओं भीड़ देखी गयी।

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