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परीक्षा से पहले 22 छात्र स्कूल से बाहर,गुटखा सेवन बना कारण

स्कूल प्रबंधन की दलील: 'अनुशासन सर्वोपरि'

जबलपुर के सालीवाड़ा गौर स्थित एकीकृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 22 छात्रों को गुटखा सेवन के आरोप में न सिर्फ तिमाही परीक्षा से वंचित कर दिया गया है, बल्कि एक महीने के लिए निलंबित भी किया गया है। इसके अलावा, प्रत्येक छात्र के अभिभावक पर 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस कठोर फैसले ने स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है, जिससे इन छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।

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स्कूल प्रबंधन की दलील: ‘अनुशासन सर्वोपरि’

स्कूल प्रबंधन ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम छात्रों में अनुशासन बनाए रखने के लिए उठाया गया है। प्रिंसिपल आभा वानखेड़े के अनुसार, 13 अगस्त को एक औचक तलाशी के दौरान 22 छात्र स्कूल परिसर के शौचालयों में गुटखा खाते पकड़े गए थे। उनका कहना है कि ये छात्र अक्सर कक्षाओं से गायब रहते थे और स्कूल परिसर में गंदगी फैलाते थे, जिससे अन्य छात्रों की पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ रहा था। वानखेड़े ने कहा, “स्कूल की छवि को बचाने और सख्त संदेश देने के लिए हमें यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।

अभिभावकों का पक्ष: ‘बड़ी सजा, साजिश का शक’

वहीं, इस फैसले से व्यथित एक छात्र के अभिभावक मोहन श्रीवास्तव ने स्कूल के निर्णय पर गंभीर सवाल उठाए हैं। श्रीवास्तव का आरोप है कि उनका बच्चा गुटखा नहीं खाता है और उसे जानबूझकर फंसाया गया है। उन्होंने कहा, 29 जुलाई को पेरेंट्स मीटिंग में स्कूल ने मेरे बच्चे के गुटखा सेवन के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी, सिर्फ यह बताया था कि वह पढ़ाई में कमजोर है। अगर वह दोषी होता तो स्कूल तभी जानकारी देता।” उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके बच्चे को निलंबन पत्र 17 अगस्त को डर के कारण मिला, जिसे वह पहले नहीं बता पाया था। श्रीवास्तव का मानना है कि यह सजा बहुत बड़ी है और उनके बच्चे का साल बर्बाद हो सकता है।

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छात्रों के भविष्य पर सवाल

स्कूल ने अपने नोटिस में कहा है कि यह कदम छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर उठाया गया है और उन्हें सीधे टी.सी. नहीं दी गई है। हालांकि, 14 अगस्त से 14 सितंबर तक के निलंबन और तिमाही परीक्षा में शामिल न हो पाने से इन छात्रों को शैक्षणिक रूप से बड़ा नुकसान होगा। जहां एक ओर स्कूल प्रबंधन अनुशासनहीनता पर लगाम लगाने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अभिभावक और शिक्षा विशेषज्ञ यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या इतनी बड़ी सजा देना सही है, खासकर तब जब आरोप केवल गुटखा खाने का है। यह देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या होता है और क्या छात्रों के भविष्य को बचाने के लिए कोई बीच का रास्ता निकल पाएगा।

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