स्वास्थ्य पर ध्यान जरूरी, गर्भसंस्कार के वैज्ञानिक पहलुओं पर विशेषज्ञों का जोर
Health needs attention, experts emphasize on scientific aspects of Garbhasanskar

स्वास्थ्य पर ध्यान जरूरी, गर्भसंस्कार के वैज्ञानिक पहलुओं पर विशेषज्ञों का जोर
भोपाल यश भारत। भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र बीएमएचआरसी के करोंद स्थित स्वास्थ्य केंद्र 7 में गुरुवार को गर्भ संस्कार का महत्व विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक चले इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य, पोषण और मानसिक संतुलन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आयुर्वेदाचार्य एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मधुरा उदय कुलकर्णी और विशिष्ट अतिथि के रूप में स्त्री रोग एवं भ्रूण चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. स्मिता ढेंगले उपस्थित रहीं। बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। आरोग्य भारती संस्था से श्री मिहिर कुमार भी इस अवसर पर मौजूद रहे। डॉ. मधुरा उदय कुलकर्णी ने कहा कि 12 से 18 वर्ष की आयु गर्भसंस्कार का पहला चरण होती है, इसलिए इस उम्र से ही बालिकाओं के पोषण और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस आयु वर्ग में हीमोग्लोबिन का स्तर 12 से कम नहीं होना चाहिए अन्यथा भविष्य में गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने पीसीओडी, मोटापा और हार्मोनल असंतुलन को भी गर्भावस्था में बाधक बताया। साथ ही संतान की योजना बनाने वाली महिलाओं को गर्भधारण से तीन माह पूर्व फोलिक एसिड लेने की सलाह दी, जिससे शिशु के मस्तिष्क विकास में सहायता मिलती है। उन्होंने गर्भवती महिलाओं के लिए सकारात्मक वातावरण, योग, अनुलोम-विलोम और ओंकार मेडिटेशन को बेहद लाभकारी बताया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. स्मिता ढेंगले ने किशोरावस्था को शारीरिक विकास का अहम समय बताते हुए कहा कि इस दौरान संतुलित आहार, मासिक धर्म स्वच्छता और नियमित स्वास्थ्य जांच अत्यंत जरूरी है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताते हुए महिलाओं को योग और नियमित व्यायाम अपनाने की सलाह दी। अध्यक्षता कर रहीं डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि गर्भसंस्कार को धार्मिक नजरिए से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना चाहिए। उन्होंने बताया कि मां के खान-पान, मानसिक स्थिति, सकारात्मक सोच, संगीत, योग और प्राणायाम का शिशु के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर सीधा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने जानकारी दी कि महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम केंद्र सरकार के अभियान के तहत आयोजित किया गया। बीएमएचआरसी द्वारा हर माह ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और आंगनवाड़ी केंद्रों व गैस पीड़ित महिलाओं को भी इससे जोड़ा जाएगा।
कार्यक्रम में डॉ. रोमा रस्तोगी, डॉ. रचिता चंसौरिया, डॉ. नेहल शाह सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।







