स्कूलों में पढ़ाई कराने की बजाए दफ्तरों में फाइल निपटा रहे मास्साब.., अटैचमेंट लेकर डीईओ ऑफिस में सालों से कुंडली मारकर जमे शिक्षक, इन्हें न शासन के निर्देशों की परवाह और न ही बच्चों के भविष्य की चिंता

कटनी, यशभारत। स्कूलों में पढ़ाई कराने की बजाए मास्साब दफ्तरों में फाइल निपटाने का काम कर रहे हैं। अटैचमेंट लेकर डीईओ ऑफिस में सालों से कुंडली मारकर जमे इन शिक्षकों को न तो शासन के निर्देशों की परवाह है और न ही बच्चों के भविष्य की चिंता। स्कूलों में वैसे ही शिक्षकों की कमी है। सरकार करोड़ों रूपए पानी की तरह बहा रही है लेकिन अटैचमेंट में डीईओ ऑफिस में जमे कतिपय कर्मचारियों को इससे कोई सरोकार नहीं है, जबकि कुछ शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी ड्यूटी तो स्कूल में है, लेकिन सुबह से लेकर शाम तक कलेक्टर और डीईओ ऑफिस में चक्कर काटते आसानी से देखते जा सकते हैं। दरअसल उन पर स्कूलों से ज्यादा जिम्मेदार अपने संगठनों की है। संगठनों की भी अपनी गाइडलाइन है। कभी प्रांतीय तो कभी जिला स्तर पर भी कार्यक्रम भी होते रहते हैं। स्कूल शिक्षा विभाग, लोक शिक्षण संचालनालय और राज्य शिक्षा केन्द्र के नियम पर इन पर लागू नहीं होते। परीक्षा का समय हो या फिर स्कूलों में होने वाली अन्य गतिविधियां, इन्हें इनसे कोई मतलब नहीं। ऐसा नहीं है कि स्कूल शिक्षा विभाग, लोक शिक्षण संचालनालय और राज्य शिक्षा केन्द्र ने अटैचमेंट को समाप्त करने के निर्देश नहीं दिए, बल्कि बकायदा पत्र जारी करते हुए कहा गया कि तीन साल की अवधि पूरी करने वाले शिक्षकों को मूल शाला में भेजा जाए लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी ने शासन के इन निर्देशों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। यही कारण है कि आज भी कतिपय कर्मचारी अटैचमेंट लेकर डीईओ ऑफिस में जमे हुए हैं। इसमे से कुछ कर्मचारी 10-10 सालों से जमे हुए हैं और मलाईदार शाखाओं का काम संभाल रहे हैं।
शिक्षकों की कमी के चलते किया अटैचमेंट समाप्त
प्रदेश की राजधानी भोपाल में कुछ दिन पहले जिला शिक्षा विभाग ने पांच सौ शिक्षकों का अटैचमेंट खत्म कर दिया है। परीक्षाओं को देखते हुए शिक्षकों की कमी के चलते यह निर्देश जारी किए गए। एक जानकारी में यह बताया गया है कि राजधानी में साढ़े तीन हजार शिक्षक हैं। ये पहली से बारहवीं तक की पढ़ाई करा रहे है। शिक्षकों की कमी के बीच दफ्तरों में शिक्षक तैनात होने का मामला कई बार सामने आ चुका है। ये मूल संस्था की बजाय दूसरे कामों में लगे हैं। कक्षाएं खाली है। यही कारण है कि राजधानी मेंं शिक्षकों का अटैचमेंट समाप्त कर दिया लेकिन कटनी में जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इससे कोईसबक नहीं लिया।






