मध्य प्रदेशराज्य

सांची पार्लर योजना बनी परेशानी, हितग्राहियों के लाखों फंसे : सांची पार्लर के नाम पर लाखों रूपये जमा कराए, डेढ़ साल से गुमठी के लिए जगह नहीं

मंडला। जिले में सांची मिल्क पार्लर योजना के लाभ लेने वाले हितग्राही पिछले डेढ़ साल से परेशान है। योजना स्वीकृति मिलने पर हितग्राही से 75 हजार रूपए जमा कराए और गुमठी के अलग से निर्माण करा दिए लेकिन गरीब हितग्राहियो को गुमठी जमाने के लिए जिला प्रशासन और नगरीय निकाय के द्वारा जगह पर काबिज नहीं करा पाए है। अब गरीब हितग्राही कलेक्टर कार्यालय और नगर पालिका के चक्कर लगाने मजबूर है लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जानकारी के अनुसार सांची मिल्क पार्लर योजना से चयनित हुए हितग्राहियों ने जबलपुर सहकारी दुग्ध संघ के खाते में 75.75 हजार रुपये जमा किए रोजगार का सपना देखाए लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी न तो गुमटी मिली और न ही जमा पूंजी वापस हुई।

 

आवेदक अब आर्थिक संकट और मानसिक प्रताडऩा झेलते हुए उच्च अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। पैसा जमा होते ही परेशानी आरंभ हो गई। 17 मई 2024 को कलेक्टर द्वारा सांची मिल्क पार्लर संचालन के लिए स्थान आवंटित किए गए थे। खासतौर पर तहसील चौराहा अग्रसेन प्रतिमा के बाजू और बंजर क्लब के सामने के अलावा नगर अन्य स्थान स्वीकृत हुआ था। हितग्राहियों ने पैसा जमा किया लेकिन इसके बाद अधिकारियों की जिम्मेदारी समाप्त हो गई। जब आवेदक स्वीकृत जगह पर गुमटी लगवाने पहुंचे तो विभागीय मैदानी अमला या फिर पहले से रसूखदारो ने गुमठी जमाने में आपत्ति लगा दी है। यहां तक कलेक्टर के मौखिक आदेश का हवाला देकर कई बार उन्हे लौटा दिया है। भ्रामक जानकारी देकर हितग्राहियो को परेशान किया जा रहा है।

जगह दी अब गुमठियां रखने पर अड़चन

नगर पालिका ने दुग्ध कॉर्नर के लिए गुमठी के लिए जगह उपलब्ध कराई है। हालांकि अब गुमठियां रखने पर आनाकानी की जा रही है जिससे हितग्राहियो को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले डेढ़ साल से लाभार्थी लगातार नगर पालिका कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। नपा ने पहले तो दुग्ध कॉर्नर संचालकों को जगह दे दी लेकिन अब उन्हें गुमठियां स्थापित करने से रोका जा रहा है। इस कारण कई लाभार्थी लाखों रुपए फं साकर बैठे हैं। जिला प्रशासन की ओर से भी उन्हें अभी तक तयशुदा जगह उपलब्ध नहीं कराई गई है। लाभार्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं जिससे उनका व्यवसाय शुरू नहीं हो पा रहा है और उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है।

योजना के हितग्राही अभया यादव को दो दिन पहले तहसीलदार ने उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि कलेक्टर ने उक्त स्थान के आदेश निरस्त कर दिया है। जब आवेदक ने सांची मिल्क पार्लर संघ और अन्य अधिकारियों से पुष्टि की तो ज्ञात हुआ कि ऐसा कोई निरस्तीकरण आदेश कभी जारी ही नहीं हुआ। आवेदक का आरोप है कि तहसीलदार उन्हें जानबूझकर गुमराह कर रहे हैं, जिससे आवंटित जमीन पर पहले से काबिज लोगो को हटाने की कार्रवाई नहीं हो सके।

निर्देश बेअसर

एक हितग्राही अपनी समस्या लेकर अपर कलेक्टर राजेंद्र कुमार सिंह के पास पहुंचा। हितग्राही की शिकायत पर अपर कलेक्टर राजेंद्र कुमार सिंह ने तुरंत नगर पालिका अधिकारी गजानन नफाड़े को फोन किया और गुमटी रखवाने के निर्देश दिए। फोन पर नगर पालिका अधिकारी गजानन नफाड़े ने सहमति जताई और आवेदक को अगली सुबह भेजने को कहा, यह आश्वासन दिया कि गुमटी रखवा दी जाएगी। लेकिन अगले दिन जब आवेदक उम्मीद के साथ नगर पालिका पहुंचा तो उसे फिर टालमटोल का सामना करना पड़ा। नगर पालिका द्वारा अपर कलेक्टर के निर्देशों का पालन नहीं किया गया जिससे हितग्राही को उम्मीदो पर पानी फिर गया। उनका कहना है कि उनकी जमा राशि को जिला प्रशान के वापिस कराया जाए।

 

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