शराब दुकानों की नीलामी से 453 करोड़ कमाएगी सरकार, जिले में ई-टेंडर और ई-ऑक्शन से होगा 63 शराब दुकानों का ठेका, नई आबकारी नीति लागू, 5 दुकानों का बनेगा समूह, अहाते भी रहेंगे बंद

कटनी, यशभारत। प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति लागू कर दी है। नई पॉलिसी के मुताबिक अब जिले की आधा सैकड़ा से अधिक शराब दुकानों का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। शराब दुकानों का निष्पादन ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के माध्यम से लाईसेंस फीस में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ किया जाएगा। इसके अलावा अहाते पहले की तरह अब भी बंद ही रहेंगे और एक समूह को पांच से ज्यादा दुकानें आवंटित नहीं की जाएंगी। कोई भी पुरानी शराब दुकान का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। शराब ठेकेदारों का कहना है कि सरकार की नई पॉलिसी से सरकार को ही फायदा होगा। लाईसेंस फीस में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी किए जाने से न केवल शराब की कीमतों में इजाफा होगा, बल्कि इससे ठेकेदारों को कई तरह के नुकसान होंगें। उधर दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि नई पॉलिसी से शराब ठेकेदारों की मोनोपॉली समाप्त हो जाएगी। विदित हो कि प्रदेश सरकार द्वारा अब तक शराब दुकानों का नवीनीकरण करते हुए ठेके पर दिया जाता था। इससे सरकार का खजाना भर जाता था।
पिछले साल 378 करोड़ में हुआ था ठेका
कटनी जिले की बात करें तो वर्ष 2024-25 में जिले में 63 देशी-विदेशी शराब दुकानों का ठेका 378 करोड़ में हुआ था। इस हिसाब से देखेें तो इस बार लाईसेंस फीस में प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ ही नए वित्तीय वर्ष में शराब का ठेका 453 करोड़ के आसपास हो सकता है। सरकार ने नई आबकारी नीति लागू करने के साथ ही आबकारी नीति में कई महत्वपूर्ण बदलाव कर दिए हैं। नई नीति के तहत अब प्रदेश में कोई भी नई शराब दुकान नहीं खुलेगी। अहाते पहले की तरह अब भी बंद ही रहेंगे। वहीं एक समूह को पांच से ज्यादा दुकानें आवंटित नहीं की जाएंगी। वहीं कोई भी पुरानी शराब दुकान का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। मदिरा दुकानों के नवीनीकरण का विकल्प समाप्त कर दिया गया है।
लाइसेंस फीस में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी
मदिरा दुकानों का निष्पादन ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के माध्यम से किया जाएगा। ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के लिए मदिरा दुकानों का आरक्षित मूल्य वर्तमान वर्ष के मूल्य में 20 प्रतिशत की वृद्धि कर निर्धारित किया जाएगा। ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के लिए मदिरा दुकानों के समूह बनाये जाएंगे। अधिकतम 5 मदिरा दुकानों का एक समूह बनाया जा सकेगा। आरक्षित मूल्य के आधार पर जिले के समूह को तीन-चार बैच में वर्गीकृत किया जाएगा। बैच के आधार पर तीन-चार चरण में ई-टेंडर और ई-ऑक्शन की कार्यवाही की जाएगी। जालसाजी की आशंकाओं को समाप्त करने के लिए प्रतिभूति राशि के रूप में सिर्फ ई-चालान, ई-बैंक गारंटी ही मान्य की जाएगी। साधारण बैंक गारंटी एवं सावधि जमा मान्य नहीं होगी।







