सिवनी यश भारत:-सिवनी घंसौर विकासखण्ड अन्तर्गत पायली पर्यटन केंद्र में बर्ड वाचिंग के दौरान संकटग्रस्त प्रजाति “एशियन ब्लैक-बेलीड टर्न” की दुर्लभ प्रजाति देखी गई है। अभी तक यह प्रजाति केवल मध्यप्रदेश के मुरैना में ही देखी गई थी। इसके अलावा पैरा ग्रीन फाल्कन प्रजाति का पक्षी भी नर्मदा नदी की खूबसूरत वादियों में विशेषज्ञों ने 4 जनवरी को देखा है। वहीं पेंच टाइगर रिजर्व में भी कई दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों का जमावड़ा पेंच नदी और इससे आसपास सर्दियों में देखने को मिल रहा है।
उत्तर वनमंडल अधिकारी डा. महेंद्र सिंह उइके ने बताया कि बर्ड वाचिंग में विशेषज्ञ बर्डर्स के साथ पायली क्षेत्र में बरगी बाध के बैक वाटर क्षेत्र में आयोजित एशियन वाटर बर्ड सेंसस में सहभागिता की गई। इस दौरान लगभग 70 से अधिक पक्षी प्रजातियों की पहचान की गई। सेंसस के दौरान आइयूसीएन की रेड लिस्ट में दर्ज संकटग्रस्त प्रजाति “एशियन ब्लैक-बेलीड टर्न” की दुर्लभ साइटिंग की गई। यह पक्षी अब तक मध्यप्रदेश में केवल मुरैना जिले में ही देखा गया था। सिवनी जिले में इसकी उपस्थिति को जिले के लिए एक बड़ी व महत्वपूर्ण जैव-विविधता संबंधी उपलब्धि माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त पैरा ग्रीन फाल्कन की भी साइटिंग की गई, जो कि दुर्लभ पक्षियों में शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार इन दुर्लभ प्रजातियों की उपस्थिति पायली क्षेत्र के स्वस्थ व संतुलित इको-सिस्टम का स्पष्ट संकेत है। पक्षी विशेषज्ञों व विद्वानों ने संभावना व्यक्त की है कि भविष्य में पायली क्षेत्र बर्ड वाचिंग के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ईको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय पक्षी दिवस आज प्रतिवर्ष 5 जनवरी को मनाया जाता है, जो पक्षी संरक्षण, उनके आवासों तथा पक्षी प्रजातियों को खतरों से बचाने वैश्विक प्रयासों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाता है। पक्षी कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं जैसे कि आवास का नुकसान, मानवीय गतिविधियों से होने वाली चोटें, हानिकारक विकिरण, भोजन व पानी में प्रापर प्रोटीन न मिलना। वर्तमान में गावों व खेतों ओर उनसे लगे छोटे बड़े नदी नाले तलब के आसपास पेस्टीसाइड का ज्यादा छिड़काव करने के कारण इनके जींस कमजोर होना व उनकी मौत होना इनका मुख्य कारण है। इन समस्याओं के कारण पक्षियों की आबादी में गिरावट आई है और उनके अस्तित्व को खतरा है। पर्यावरणवादी इमरान खान ने बताया कि पक्षियों की वायु प्रदूषण से श्वसन प्रणाली प्रभावित होती है, और ध्वनि प्रदूषण से वे दिशा और संचार में समस्याओं का सामना करते हैं। पक्षियों का अवैध शिकार और तस्करी भी एक बड़ी समस्या है। कई पक्षी अपने रंगीन पंखों या मांस के लिए मारे जाते हैं, जिससे उनकी जनसंख्या तेजी से घट रही है।
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