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यह नर्मदा का पानी नहीं, अमृत जल है : डॉ मोहन यादव, मुख्यमंत्री बोले – लक्ष्य कठिन था, लेकिन हनुमान जी की शक्ति ने आसान बनाया

देश दुनियां के लोग आयेंगे इस चमत्कार की केस स्टडी करने

( स्लीमनाबाद से आशीष सोनी के साथ संजय खरे )

कटनी, यशभारत। स्लीमनाबाद टनल के निरीक्षण के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि सिंचाई के साधन बढ़ने से क्षेत्र से श्रमिकों का पलायन रुकेगा। लोगों के चेहरे खिलेंगे, समृद्धि आएगी। 1 लाख 85 हेक्टेयर क्षेत्र में अब सिंचाई हो सकेगी। यह नर्मदा का पानी नहीं बल्कि अमृत जल है। चुनौतियां तो अपार थी, लेकिन संकटमोचक हनुमान ने काम को सरल बनाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 20 से 40 मीटर जमीन के नीचे है। बरगी बांध से निकलने वाली यह कैनाल भूगर्भीय संरचना का अनुपम उदाहरण है। कटनी अनेक खनिजों का क्षेत्र है। कठोर चट्टान काटने वाला कटर प्रभावित होता है। मशीन दो बार खराब हुई। मिट्टी और पानी की चुनौती के साथ धंसाव, चट्टानों का बदलना बहुत कठिन था। मशीन की ब्लेड खराब होती रही। कटर मशीन का टूटना, कार्बन डाय ऑक्साइड का उत्सर्जन होना भी कठिन था। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि 2007 से शुरू हुए काम में हर कदम पर संघर्ष रहा। 2023 में जब हमारी सरकार बनी तब विभाग और ठेकेदार ने हाथ जोड़ लिए थे। नई मशीन बनना बंद हो गई। केवल एक मशीन काम कर रही थी। मीडिया से बातचीत के दौरान सांसद वीडी शर्मा, सतना सांसद गणेश सिंह, विधायक संदीप जायसवाल, विधायक प्रणय पांडे, विधायक धीरेन्द्र सिंह और भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक सोनी टंडन भी मौजूद रहे।।

1600 करोड़ की लागत से बनी टनल

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यहां के व्यापारियों,किसानों को उपहार मिलने वाला है। 1600 करोड़ की लागत से पूरी हो रही इस परियोजना में केंद्र सरकार का पूरा सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि पावन मन से काम करो तो सफलता अवश्य मिलेगी। भगवान श्रीराम का आशीर्वाद है। कटनी नदी ऊपर से गुजरेगी और नीचे से नर्मदा का जल बहेगा। उद्योग धंधों को भी नर्मदा का पानी मिलेगा। बुंदेलखंड और बघेलखंड के इलाके को पूरा लाभ मिलेगा। विजयराघवगढ़ के 153 गांवों के किसान लाभान्वित होंगे। टनल के साथ सिंचाई का रकवा भी बढ़ेगा। कांग्रेस के शासनकाल में साढ़े 7 लाख हेक्टेयर में भी सिंचाई होती थी, लेकिन भाजपा सरकार में अब 65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होने जा रही है। 1 लाख हेक्टेयर सिंचाई का रकवा आने वाले रवि सीजन में मिलेगा।

देश की अनूठी इंजीनियरिंग का उदाहरण है टनल

मुख्यमंत्री ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह सुरंग विंध्य पर्वतमाला के भीतर से नर्मदा के जल को गुरुत्वाकर्षण के आधार पर सोन नदी के कछार तक पहुंचाने वाली देश की अनूठी इंजीनियरिंग उपलब्धि है। इसके पूरा होने के साथ ही जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के करीब 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होगा।

भागीरथी संकल्प का उदय

सीएम ने बताया कि यह जल-सुरंग केवल कंक्रीट और पत्थरों को जोड़कर बनाई गई कोई यांत्रिक संरचना नहीं है, बल्कि यह सदियों पुराने एक पौराणिक विरह को मिटाने वाला पवित्र महासेतु है। लोक मान्यताओं के अनुसार, अमरकंटक के मैकल पर्वतों से निकलने वाली माँ नर्मदा और सोनभद्र विपरीत दिशाओं में बहकर हमेशा के लिए एक-दूसरे से दूर चले गए थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसी प्राचीन विरह को मिटाने और विंध्य के सूखे खेतों को पानी देने के लिए इस टनल परियोजना को अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बनाया। आज उन्हीं के भगीरथ प्रयासों से विंध्य पर्वतमाला से अमृत-धारा सीधे सोन नदी के कछार में मिलने के लिए आतुर खड़ी है।

मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच के नतीजे आए सामने

इस मौके पर कलेक्टर आशीष तिवारी ने यशभारत से बातचीत में कहा कि इस महा-परियोजना को इसकी मंजिल तक पहुंचाने का पूरा श्रेय मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दूरदर्शी नेतृत्व और अभूतपूर्व प्रशासनिक निर्णयों को जाता है। उन्होंने पदभार ग्रहण करते ही इस परियोजना के महत्व को समझा और लगातार की गई व्यक्तिगत समीक्षाओं, त्वरित ऑन-द-स्पॉट फैसलों और निरंतर दिए गए कम बजट समर्थन ने इस बेहद जटिल कार्य को एक जादुई रफ्तार दे दी। अब इस 11.952 किलोमीटर लंबी महा-सुरंग का काम लगभग पूरा हो चुका है, जिसमें अब मात्र अंतिम एक मीटर का ब्रेक-थ्रू सफर शेष रह गया है।

असंभव को कर दिखाया संभव

तकनीकी रूप से विंध्य की 40 मीटर ऊंची रिज लाइन को भेदना पूरी दुनिया के इंजीनियरों के लिए एक स्वप्न जैसा था। जमीन से लगभग 30 मीटर नीचे चल रहे इस महा-अभियान में मार्बल-लाइमस्टोन की चमकती कठोरता, डोलोमाइट की दृढ़ता और पानी में घुली चूने की विशालकाय भूमिगत गुफाओं ने हर कदम पर रास्ता रोका। टनल के भीतर प्रति मिनट 25 हजार लीटर तक उफनते पानी के रिसाव और अचानक धंसने वाली मिट्टी जैसी विकट परिस्थितियों में जब पूर्व में काम कर रही अमेरिकी मशीन भी टूटकर पस्त हो गई, तब मुख्यमंत्री के दृढ़ संकल्प के चलते त्वरित निर्णय लेकर अत्याधुनिक जर्मन हेरेनकनेक्ट मशीन और विशेष टेम ग्राउटिंग तकनीक को युद्धस्तर पर उतारा गया। यह मध्यप्रदेश सरकार की संवेदनशीलता ही थी कि घनी आबादी, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे ट्रैक के ठीक नीचे से गुजरने के बावजूद इस टनल को बिना किसी क्षति के पूरी सुरक्षा के साथ पूर्ण कर लिया गया।

विश्व स्तरीय निर्माण तकनीक

इस टर्न-की आधार पर स्वीकृत महा-परियोजना को धरातल पर उतारने का जिम्मा हैदराबाद की प्रतिष्ठित निर्माण एजेंसी मेसर्स पटेल-एस.ई.डब्ल्यू. (संयुक्त उपक्रम) को सौंपा गया था। वर्ष 2008 में जब इस विशाल परियोजना का अनुबंध हुआ था, तब इसकी शुरुआती लागत 799 करोड़ रुपये थी। हालांकि, विंध्य के भू-गर्भ की अप्रत्याशित और असाधारण भौगोलिक बाधाओं, अभूतपूर्व जल रिसाव को रोकने के लिए किए गए विशेष प्रयासों और वैश्विक तकनीक के समावेश के कारण इस पर अब तक कुल 1610.47 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है। इस कुल व्यय में जहां मूल कार्यमद पर 772.33 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, वहीं समय के साथ हुए मूल्य समायोजन पर 573.71 करोड़ रुपये, उच्च क्षमता के आधुनिक डीवॉटरिंग सिस्टम पर 123.99 करोड़ रुपये, वर्टिकल शाफ्ट के निर्माण पर 19.36 करोड़ रुपये और चट्टानों के स्थिरीकरण के लिए की गई केमिकल ग्राउटिंग पर 121.08 करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई है।

भौतिक प्रगति के नये कीर्तमान

सरकार की इसी अनवरत वित्तीय और तकनीकी मदद का सुखद परिणाम है कि आज इस पूरे अनुबंध का 96.66 प्रतिशत भौतिक कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। परियोजना के तहत आने वाली 12.135 किलोमीटर लंबी ओपन कट नहर और 11.952 किलोमीटर लंबी मुख्य ऐतिहासिक जल-सुरंग का भौतिक निर्माण शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। वहीं, कट एंड कवर तकनीक से बनाई जा रही 0.913 किलोमीटर नहर का भी 0.725 किलोमीटर हिस्सा पूरा कर लिया गया है और अब केवल नाममात्र का 0.188 किलोमीटर का काम शेष है, जिसे अंतिम लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ाया जा रहा है।

विंध्य और महाकौशल के 5 जिलों में समृद्धि

सीएम ने कहा कि यह विशाल जल-सुरंग देश की पहली ऐसी इंजीनियरिंग मिसाल बनने जा रही है, जहां 10.14 मीटर व्यास की टनल से लाखों क्यूसेक नर्मदा जल बिना किसी बिजली या भारी पंपों के, केवल प्राकृतिक गुरुत्वाकर्षण यानी ग्रेविटी फ्लो के सहारे बहेगा। बरगी दायीं तट मुख्य नहर के माध्यम से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना जिलों के लगभग 1450 गांवों की 2 लाख 45 हजार हैक्टेयर भूमि हमेशा के लिए सिंचित हो जाएगी। टनल के क्रियाशील होते ही इसके सीधे कमांड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कटनी जिले की 21 हजार 823 हैक्टेयर, मैहर जिले की 54 हजार 227 हैक्टेयर, सतना जिले की 1 लाख 4 हजार 970 हैक्टेयर, रीवा जिले की 3 हजार 84 हैक्टेयर और पन्ना जिले की 448 हैक्टेयर सूखी भूमि को हरा-भरा जीवन मिल जाएगा।IMG 20260717 WA0670

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