मंडलाlबालाघाट में सुनीता ने 1 नवंबर को चौरिया में बन रहे हॉकफोर्स के कैंप में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद पुलिस और सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा है। इस घटना ने अन्य नक्सलियों के मुख्यधारा में लौटने की उम्मीद जगाई है। इसके मद्देनजर मंडला पुलिस ने नक्सल प्रभावित इलाकों में जनजागरण अभियान तेज कर दिया है। केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी दिशा में देशभर में सुरक्षा बलों के साथ-साथ राज्य सरकारें भी विशेष अभियान चला रही हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए एक आकर्षक आत्मसमर्पण नीति लागू की है।
एसपी बोले- आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को घर बनाने जमीन मिलेगी
मंडला एसपी रजत सकलेचा ने बताया कि वर्ष 2023 में शुरू की गई यह नीति देश के अन्य राज्यों की योजनाओं से अधिक लाभकारी है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकारी नौकरी, घर बनाने, जमीन खरीदने, व्यवसाय शुरू करने और विवाह जैसे सामाजिक कार्यों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, उन पर घोषित इनाम की राशि भी उन्हें ही दी जाती है। उन्हें खाद्यान्न सहायता योजना और आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज और आवश्यक सुविधाएं भी मिलती हैं। एसपी सकलेचा ने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ नक्सलियों से हथियार छीनना नहीं, बल्कि उनका भविष्य सुरक्षित बनाना है, ताकि वे समाज में सम्मान के साथ जीवन जी सकें।” इसी नीति के प्रभाव से हाल ही में बालाघाट जिले में एक महिला नक्सली ने आत्मसमर्पण किया है। इस घटना के बाद मंडला पुलिस ने नक्सल प्रभावित इलाकों में जनजागरण अभियान तेज कर दिया है। पुलिस और वन विभाग के सहयोग से गांव-गांव जाकर पर्चे बांटे जा रहे हैं। इन पर्चों में आत्मसमर्पण नीति के लाभ और प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया गया है। साथ ही ग्रामीणों से भी अपील की जा रही है कि वे नक्सलियों को आत्मसमर्पण कर मुख्य धारा में शामिल होने के लिए प्रेरित करें।
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