महंगा दूध: उदासीन प्रशासन.जनप्रतिनिधियों का मौन, जेएनकेवीवी वेटरनरी अमूल और सांची से महंगा बिक रहा दूध

जबलपुर, यशभारत। पिछले तीन महीनों से शहर में दूध के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। लेकिन प्रशासन की उदासीनता और कथित जनप्रतिनिधियों के मौन व्रत ने आम जनता की परेशानी और बढ़ा दी है। उपभोक्ता महंगे दूध खरीदने के लिए मजबूर हैं, जबकि शहर में उचित दाम पर दूध उपलब्ध कराने की पर्याप्त क्षमता मौजूद है।
दूध की मनमानी कीमतें
स्थानीय बाजार सर्वेक्षण के अनुसार, शहर के डेरी वाले दूध को 75 से 80 रुपये प्रति लीटर की दर से बेच रहे हैं। वहीं वेटरनरी और जेएनकेवी डेरी फार्म से दूध की कीमत केवल 58 से 60 रुपये प्रति लीटर है। इसके अलावा अमूल, सांची और अन्य पैक्ड दूध कंपनियों के दाम माफिया वाले डेरी की तुलना में काफी कम हैं।
एक स्थानीय उपभोक्ता ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, “हम रोजाना दूध खरीदने को मजबूर हैं, लेकिन मुनाफाखोर डेरी वाले इतने महंगे दाम वसूल रहे हैं कि रोजमर्रा की जरूरत का बजट बिगड़ गया है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मदद की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल कोई सुनवाई नहीं हो रही।”
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर दूध माफिया पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। वहीं कई जनप्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर मौन हैं। लोगों का आरोप है कि दूध माफिया और डेरी वाले अपने कारोबार में मुनाफा कमाने में व्यस्त हैं, जबकि आम जनता की परेशानियों को कोई नहीं देख रहा।
विशेषज्ञों का कहना है कि दूध की बढ़ती कीमतें सीधे आम जनता की जेब पर असर डाल रही हैं। उनका सुझाव है कि दूध की कीमतों पर नियंत्रण, पारदर्शिता और नियमित मॉनिटरिंग की आवश्यकता है।
संभावित समाधान
विशेषज्ञ और नागरिक संगठनों का सुझाव है कि:
• प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को सक्रिय होकर मुनाफाखोर डेरी वालों पर निगरानी रखनी चाहिए।
• पैक्ड और डेयरी फार्म के बीच समान कीमत नीति लागू की जाए।
• उपभोक्ताओं को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दूध उपलब्ध कराने के लिए सरकारी डेरी और निजी फार्म को प्रोत्साहित किया जाए।
उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधि सक्रिय नहीं हुए, तो वे मजबूरी में महंगे दूध को ही खरीदते रहेंगे, जिससे आम जनता की आर्थिक परेशानी और बढ़ती जा रही है।
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