मध्य प्रदेशराज्य

ममता की चिता पर सुलगते सवाल: 2 मासूम बेटों के साथ मां का हुआ अंतिम संस्कार

TI ने कहा- 'प्रथम दृष्टया आत्महत्या', पर गांव में 'हत्या' की सुगबुगाहट

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सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ जिले के रहली अंतर्गत मैनाई गांव में गुरुवार की रात जो खौफनाक मंजर सामने आया, उसने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे प्रदेश की रूह को कंपा दिया है। अलग फंदे पर लटकी मां और उसके दो मासूम बेटों की लाशों ने ममता और नियति पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार को नम आंखों के बीच तीनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन गांव की हवाओं में अभी भी सिसकियां और संदेह घुला हुआ है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए रहली टीआई सुनील शर्मा ने ‘यश भारत’ के संभागीय ब्यूरो से विशेष बातचीत में बताया कि पुलिस हर पहलू की सूक्ष्मता से जांच कर रही है। टीआई के अनुसार, “प्रारंभिक जांच और घटनास्थल की परिस्थितियों को देखते हुए मामला आत्महत्या का ही प्रतीत हो रहा है।” हालांकि, पुलिस अभी किसी भी ठोस नतीजे पर पहुंचने से पहले पोस्टमॉर्टम की विस्तृत रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्यों का इंतजार कर रही है।

हत्या या आत्महत्या: ग्रामीणों और परिजनों के मन में संशय

भले ही पुलिस इसे शुरुआती तौर पर खुदकुशी मान रही हो, लेकिन गांव की गलियों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। मृतका रचना लोधी, 5 वर्षीय ऋषभ और महज 2 वर्षीय राम की एक साथ मौत ने कई कयासों को जन्म दे दिया है। घटना के वक्त घर का दरवाजा खुला होना सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। परिवार के कुछ सदस्यों और ग्रामीणों के मन में यह आशंका घर कर गई है कि क्या यह वाकई आत्महत्या है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश? ग्रामीण जनों द्वारा दबी जुबान में ‘हत्या’ की आशंका भी जताई जा रही है, जिसने मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है।

एक ही चिता पर खाक हुए तीन सपने, रो पड़ा मैनाई गांव

शुक्रवार का दिन मैनाई गांव के इतिहास में सबसे काले दिन के रूप में दर्ज हो गया। जब मां और दोनों मासूम बच्चों का पोस्टमॉर्टम के बाद गांव में अंतिम संस्कार किया गया, तो वहां मौजूद हर शख्स फफक-फफक कर रो पड़ा। वह मां जो कल तक अपने बच्चों का हाथ थामे चलती थी, आज उन्हीं के साथ पंचतत्व में विलीन हो गई। गांव के श्मशान घाट पर जब चिता की आग दहकी, तो मानों पूरे गांव का कलेजा जल उठा। घर के आंगन में अब बच्चों की किलकारियां नहीं, बल्कि सिर्फ वीरानी और मातम पसरा है।

एडिशनल एसपी लोकेश कुमार सिन्हा ने यश भारत से स्पष्ट किया है कि जांच थमी नहीं है। परिजनों के बयान और आसपास के लोगों से पूछताछ लगातार जारी है। क्या वाकई किसी घरेलू कलह ने रचना को इतना मजबूर कर दिया कि उसने अपने दो नन्हे बच्चों के गले में खुद फंदा डाल दिया? या फिर पर्दे के पीछे कोई और हकीकत छिपी है? इन तमाम सुलगते सवालों के जवाब अब विस्तृत पुलिस जांच के बाद ही सामने आएंगे।

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