सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ जिले की शाहगढ़ पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर बेरोजगारी का फायदा उठाते हुए युवाओं को ठगने की सारी हदें पार कर दी थीं। पुलिस ने घेराबंदी कर एक सफेद बोलेरो गाड़ी, पुलिस की वर्दी और अन्य फर्जी दस्तावेजों के साथ फर्जी डीएसपी और उसके दो फर्जी आरक्षकों को दबोच लिया है। इस गिरोह के तार जबलपुर से जुड़े होने के कारण क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
नीली बत्ती वाली बोलेरो और वर्दी का रौब
पकड़े गए आरोपियों में मुख्य सरगना शिवम चतुर्वेदी है, जो खुद को पुलिस उपाधीक्षक (DSP) बताकर लोगों पर रौब झाड़ता था। गिरोह की खास बात यह थी कि ये लोग पूरी तरह पुलिसिया अंदाज में चलते थे। इनके साथ जबलपुर जिले के बरही निवासी राजकुमार ठाकुर और सतीश सिंह ठाकुर फर्जी आरक्षक बनकर सुरक्षा घेरा तैयार करते थे। पुलिस ने इनके पास से एक बोलेरो गाड़ी बरामद की है, जिसका इस्तेमाल ये ठगी की वारदातों के लिए करते थे।
जबलपुर से सागर तक ठगी का जाल
यश भारत के संभागीय ब्यूरो की पड़ताल में सामने आया कि यह गिरोह विशेष रूप से उन युवाओं को निशाना बनाता था जो पुलिस या सरकारी नौकरी की तलाश में थे। जबलपुर के बरही निवासी दोनों फर्जी आरक्षक लोगों को यह विश्वास दिलाते थे कि ‘साहब’ (फर्जी DSP) की ऊपर तक पहुंच है और वे पैसे लेकर सीधे भर्ती करा सकते हैं। सागर के शाहगढ़ इलाके में जब इनकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं, तो पुलिस ने जाल बिछाकर इन्हें वर्दी सहित रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस की कड़ी कार्रवाई और जनता को चेतावनी
एडिशनल एसपी संजीव कुमार उईके के निर्देशन में शाहगढ़ पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने युवाओं को अपनी ठगी का शिकार बनाया है और इनके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश कुमार सिन्हा तथा डॉ संजीव कुमार उईके ने यश भारत के संभागीय ब्यूरो से चर्चा में कहा है कि पुलिस विभाग में भर्ती की एक पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया होती है। नौकरी के नाम पर किसी भी व्यक्ति को नकद राशि या प्रलोभन न दें। यदि कोई खुद को बड़ा अधिकारी बताकर रुपयों की मांग करता है, तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें।
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