मध्य प्रदेशराज्य

बेटे की चाहत और पति की बेरुखी ने ली पांच जिंदगियां: चार बेटियों को कुएं में फेंक मां ने लगाई फांसी, गांव में एक साथ उठीं पांच अर्थियां

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सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ जिले के केसली थाना अंतर्गत खमरिया गांव में सामने आई दिल दहला देने वाली सामूहिक हत्या और आत्महत्या की घटना सामने आई है। घटना के पीछे ‘बेटे की चाहत’ और एक मां की अंतहीन प्रताड़ना का खौफनाक सच सामने आया है। समाज की संकीर्ण मानसिकता और पारिवारिक उपेक्षा ने एक हंसते-खेलते परिवार को श्मशान में बदल दिया। पोस्टमार्टम के बाद जब गांव में एक साथ मां और उसकी चार मासूम बेटियों का अंतिम संस्कार किया गया, तो हर आंख नम थी और पूरे इलाके में मातम पसर गया।

चौथी बेटी के जन्म के बाद से घर नहीं आया था पति

यश भारत के संभागीय ब्यूरो द्वारा की गई घटना के कारणों की पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मृतका सविता लोधी (28) का पति चंद्रभान लोधी जबलपुर में बस कंडक्टर है। बताया जा रहा है कि वह पिछले करीब एक साल से घर नहीं आया था। पांच माह पूर्व जब सविता ने चौथी बेटी मनीषा को जन्म दिया, तो पति की बेरुखी और बढ़ गई। वह अपनी पांच माह की मासूम बेटी का चेहरा देखने तक नहीं पहुंचा। चौथी बार भी बेटी होने के कारण सविता समाज और परिवार के तानों से मानसिक रूप से टूट चुकी थी।

बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात जब दुनिया सो रही थी, तब अवसाद और बेरुखी से तंग आकर सविता ने आत्मघाती कदम उठाया। उसने अपनी चारों सोती हुई बेटियों—अंशिका उर्फ टीना (7), रक्षा (5), दीक्षा (3) और मात्र 5 माह की मनीषा को एक-एक कर खेत में बने 20 फीट गहरे कुएं में फेंक दिया। मासूमों की हत्या करने के बाद सविता ने पास ही बेरी के पेड़ से फंदा लगाकर अपनी जान दे दी।

चादर में लिपटी मिली 5 माह की मासूम

गुरुवार दोपहर जब तलाशी अभियान चलाया गया, तो दृश्य देखकर पुलिस और ग्रामीणों का कलेजा कांप उठा। तीन बच्चियों के शव पानी में तैरते मिले, जबकि 5 माह की सबसे छोटी बच्ची मनीषा का शव चादर में लिपटा हुआ कुएं की गहराई से बरामद हुआ।

गांव में पसरा सन्नाटा, गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार

पुलिस ने शुक्रवार को शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। इसके बाद गांव में ही गमगीन माहौल में सभी का अंतिम संस्कार किया गया। एक साथ पांच अर्थियां उठते देख ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। ‘यश भारत’ से चर्चा में ग्रामीणों ने बताया कि अगर समाज और परिवार ने बेटी के जन्म को अभिशाप न माना होता, तो आज ये पांचों जिंदगियां हमारे बीच होतीं।

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