कटनीजबलपुरमध्य प्रदेश

बीजेपी में सर्जरी : चुनाव से पहले कतरे कई नेताओं के पर

आशीष सोनी

कटनी। भारतीय जनता पार्टी की जिला कार्यकारिणी में कल की गई बड़ी सर्जरी ने कार्यकर्ताओं को चौंका दिया। 15 माह बाद जिलाध्यक्ष ने 20 में से 7 पदाधिकारी बदल दिए। इसके पहले छोटे फेरबदल में जिला उपाध्यक्ष और महामंत्री के पद आपस में बदले गए थे। अब तक रामरतन पायल के जमाने की कार्यकारिणी से ही काम चलाया जा रहा था, लेकिन लोकसभा चुनाव के पहले संगठन को मैदानी स्तर पर और अधिक गतिशील करने के लिए कई सीनियर नेताओं की पदों से छुट्टी कर नए लोगों को जगह दे दी गई है। सर्जरी की सबसे बड़ी गाज तो पार्टी की उन तीन नेत्रियों पर पड़ी, जो लंबे समय से संगठन में काम कर रही थी। जिलाध्यक्ष बदलते जाने के बावजूद जिले की टीम में इनका स्थान हमेशा सुरक्षित रहा।

 

एक झटके में जिस तरह से इन्हें केवल जिला कार्यसमिति तक सीमित करते हुए नए चेहरों को लाया गया है, उसको लेकर कल से ही असंतोष देखा जा रहा है। अनुशासन के चलते खुलकर कोई कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है, लेकिन दबी जुबान से बदलाव के तौर-तरीकों पर सभी ने सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। भारतीय जनता पार्टी के जिला संगठन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। यह इस ऑपरेशन से जाहिर हो गया। लोकसभा चुनाव के एन पहले इस बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी, इस पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। बहाना इन पदाधिकारियों के निष्क्रिय रहने का है, या इसी बहाने अपने भरोसेमंद लोगों की एंट्री का है। इस पर संगठन के भीतर चर्चा चल निकली है। अब तक जिला संगठन में पुरानी टीम ही काम कर रही थी।

 

दीपक सोनी टण्डन के हाथ जिलाध्यक्षी आये तकरीबन 15 माह का वक्त बीत चुका होगा और इस दरम्यान विधानसभा चुनाव भी निकल गए लेकिन महज चेतन हिंदुजा और सुनील उपाध्याय के पदों की अदलाबदली और रणवीर कर्ण की नियुक्ति के अतिरिक्त इस दौर में टण्डन को प्रदेश नेतृत्व ने कोई बड़ा फेरबदल नहीं करने दिया। कुछ समय पहले अपने खास मित्र रणवीर कर्ण की जिला संगठन में भूमिका तय कराने में वे जरूर सफल हो गए थे। बाकी टीम पुरानी ही काम कर रही थी। प्रीति सूरी के मेयर बनने के बाद जिला संगठन में जिला मंत्री का एक पद रिक्त हुआ तो धीरेंद्र सिंह के बड़वारा से विधायक बनने के बाद से महामंत्री का पद खाली था। इसके पहले धीरेंद्र को भी अचानक से संगठन में लाया गया था ताकि विधानसभा चुनाव के लिए उनकी तौयारी कराई जा सके।

सीनियर बाहर, जूनियर अंदर
जिला कार्यकारिणी से बाहर किये गए पदाधिकारियों में हटाये जाने के बाद से आक्रोश व्याप्त है। हालांकि वे संगठन की मर्यादा के चलते कुछ नही कह पा रहे लेकिन नाम न छापने की शर्त पर यशभारत से बातचीत में सीनियर भाजपा नेत्रियों ने कहा कि पार्टी में भीड़ ज्यादा हो गई है इसलिए अब वरिष्ठों का सम्मान नही बचा। बदलाव में कम से कम वरिष्ठता का ध्यान रखा जाना था, लेकिन जिलाध्यक्ष ने अपने अधिकार का इस्तेमाल किया है। पूर्व पदाधिकारियों ने साफ कहा कि संगठन के सारे काम बस चुनिंदा लोगों को सौंपे जा रहे हैं और योजनाबद्ध ढंग से उन्हें ही आगे बढ़ाया जा रहा है।

 

इसके उलट जिला संगठन के सूत्र कहते हैं कि बदलाव समय की मांग है। समय अनुसार नई पीढ़ी के लिए जगह बनानी पड़ती है। नए चेहरों को लाने के साथ जातीय समीकरणों का ध्यान भी रखा गया है। 3 महिलाओं को हटाकर दो महिलाओं शांति यादव और सीता सोनी को एंट्री दी गई है। दोनो पिछड़े वर्ग की हैं और विजयराघवगढ़ तथा बहोरीबंद क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं। रवि खरे लंबे समय से पार्टी में सक्रिय हैं, जबकि डारेश्वर पाठक और विजय गुप्ता को विधानसभा क्षेत्रों में संतुलन साधने के लिए लाया गया है। इसके अलावा अंकिता तिवारी को एक और प्रमोशन दे दिया गया है। आशीष गुप्ता बाबा की नई एंट्री ने जरूर सबको चौंका दिया है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का बढ़ा वर्चस्व
जिस तरह से आएएसएस से मुक्त कर दीपक टण्डन को डायरेक्ट पायल की बॉडी में उपाध्यक्ष बनाकर भाजपा संगठन में लाया गया था, ठीक उसी तर्ज पर टण्डन ने भी अध्यक्ष बनने के बाद अपनी पसंद के चेहरों को विद्यार्थी परिषद से लेकर बीजेपी की जिला टीम में एंट्री दी। पहले रणवीर कर्ण और अब आशीष गुप्ता। इसके पहले पायल के समय ही खुद टण्डन, अम्बरीष वर्मा और अंकिता तिवारी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पृष्ठभूमि के ही चेहरे थे। ये सब सीधे बीजेपी की जिला टीम में पदाधिकारी बनकर ही भाजपा के साथ जुड़े। अंकिता तिवारी पहले जिला मंत्री थी अब एक और प्रमोशन के साथ उनका ओहदा बढ़ा दिया गया है।

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