मध्य प्रदेशराज्य

नन्ही कुसुम का बच गया जीवन : 21 दिन की विशेष देखरेख से कुपोषण पर जीत

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मंडला lजिला चिकित्सालय मंडला स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में 21 दिनों की विशेष देखरेख और सतत निगरानी से एक गंभीर रूप से कुपोषित बालिका को नया जीवन मिला। अब नन्ही कुसुम पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुकी है।

 मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.जे. मोहंती ने बताया कि ग्राम चपटल टोला गौराछापर, तहसील नैनपुर निवासी 1 माह 23 दिन की बालिका कुसुम मरकाम को 29 जनवरी 2026 को गंभीर अवस्था में जिला चिकित्सालय मंडला में भर्ती कराया गया था। बच्ची को सांस लेने में परेशानी और स्तनपान करने में कठिनाई हो रही थी। प्रारंभिक जांच के बाद उसे पीआईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया और लगातार निगरानी में रखा गया। 12 दिन बाद स्थिति में सुधार होने पर बच्ची को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में स्थानांतरित किया गया। उस समय उसका वजन मात्र 1.700 किलोग्राम और लंबाई 45 सेमी थी। कम वजन के कारण वह गंभीर कुपोषण श्रेणी में थी। विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में एनआरसी गाइडलाइन के अनुसार उपचार, उचित पोषण, स्तनपान सहयोग और कंगारू मदर केयर के माध्यम से देखभाल की गई।

 21 दिनों की निरंतर चिकित्सा, संतुलित आहार और मां को दी गई परामर्श सेवाओं का सकारात्मक परिणाम सामने आया। डिस्चार्ज के समय बच्ची का वजन बढ़कर 2.285 किलोग्राम हो गया और वह सफलतापूर्वक स्तनपान करने लगी। सभी आवश्यक टीकाकरण भी पूर्ण कराए गए। सिविल सर्जन डॉ. विजय धुर्वे के मार्गदर्शन में चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ की टीम ने समर्पण भाव से उपचार किया। स्टाफ द्वारा मां को स्तनपान, संक्रमण से बचाव एवं नियमित टीकाकरण के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई, जिससे बच्ची के समुचित विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ। 

 कुसुम की मां ने भावुक होकर बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र में मिली देखरेख और उपचार से उनकी बच्ची को नया जीवन मिला है। उन्होंने शासन-प्रशासन और अस्पताल की टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। यह कहानी दर्शाती है कि समय पर उपचार, विशेषज्ञ देखरेख और मातृ सहयोग से गंभीर कुपोषण जैसी चुनौती को भी हराया जा सकता है।

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