मध्य प्रदेशराज्य

टीआई ने फरिश्ता बनकर खींची थी मौत की डोर : पर नियति ने छीन लिया , हृदयघात के कारण इलाज के दौरान निधन

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सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ नियति कितनी क्रूर हो सकती है, इसका अहसास बुधवार को पूरे सागर शहर ने किया। जिस जांबाज साथी को बचाने के लिए खाकी ने अपना पसीना बहाया, डॉक्टरों ने मशीनें लगा दीं और पूरे शहर ने दुआएं मांगी, आखिरकार वह मौत से जिंदगी की जंग हार गया। मकरोनिया के  पत्रकार जितेन्द्र श्रीवास (जित्तू) का हृदयघात के कारण इलाज के दौरान निधन हो गया। बुधवार सुबह गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

पत्रकार जितेंद्र श्रीवास मंगलवार को मकरोनिया थाने में किसी कवरेज के सिलसिले में पहुंचे थे। तभी अचानक उनके सीने में तेज दर्द उठा और वे बेसुध होकर गिर पड़े। चंद सेकंडों में उनकी नब्ज डूबने लगी और शरीर ठंडा पड़ने लगा। 

इस घटनाक्रम से हतप्रभ मकरोनिया थाना प्रभारी (TI) रावेंद्र सिंह चौहान ने पुलिस की संवेदनशीलता की एक नई मिसाल पेश की। जितेंद्र को मरणासन्न हालत में देख टीआई ने प्रोटोकॉल किनारे रखा और खुद जमीन पर बैठकर जितेंद्र को CPR (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू किया। लगभग 5 मिनट तक वे लगातार सीना पंप करते रहे। इस भगीरथ प्रयास का फल मिला और जितेंद्र की रुकी हुई सांसें वापस लौट आईं। तत्काल उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया।

दुआओं का दौर और अंतिम विदाई

जितेंद्र की हालत स्थिर होने की खबर पर शहर के कई पत्रकार जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक अस्पताल पहुंचे और उनके स्वस्थ होने की कामना की। लेकिन डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और देर रात नियति ने उनसे अंतिम सांसे भी छीन ली।

अंतिम संस्कार: नम आंखों ने दी’जित्तू’ को अंतिम विदाई

आज सुबह दीनदयाल नगर मुक्तिधाम पर जितेंद्र का अंतिम संस्कार किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। वरिष्ठ पत्रकार, प्रेस क्लब के सदस्य, जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में आम नागरिक शामिल हुए। श्मशान घाट पर हर आंख नम थी। सहकर्मियों ने उन्हें एक निडर और ऊर्जावान साथी के रूप में याद किया।

जितेंद्र श्रीवास केवल एक फोटो जर्नलिस्ट नहीं थे, बल्कि वे मकरोनिया और सागर की खबरों की धड़कन थे। उनका मिलनसार स्वभाव और हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहना उन्हें भीड़ से अलग बनाता था। उनके असामयिक निधन से सागर के पत्रकारिता जगत में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसे भरना नामुमकिन है।

यश भारत की श्रद्धांजलि: यश भारत परिवार अपने साथी जितेंद्र श्रीवास को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है। ईश्वर उनके परिजनों को यह वज्रपात सहने की शक्ति प्रदान करें।

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