आरबीएसके बना बीमार बच्चों के लिए वरदान : गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों को उपचार के लिए भेजा जबलपुर

यशभारत डिंडौरी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत डिंडौरी जिले के ग्रामीण अंचलों में रहने वाले जन्मजात एवं गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की पहल लगातार जारी है। इसी क्रम में सोमवार को जिले के विभिन्न गांवों के आंगनबाड़ी केंद्रों एवं स्कूलों से चिन्हित बच्चों को विशेषज्ञ उपचार के लिए जबलपुर रवाना किया गया। इन बच्चों का इलाज पूरी तरह निशुल्क कराया जाएगा, जिसका संपूर्ण खर्च केंद्र एवं राज्य सरकार वहन करेगी।
कार्यक्रम के तहत कटे होंठ एवं तालु (क्लेफ्ट लिप एवं क्लेफ्ट पैलेट), जन्मजात हृदय रोग, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक एवं शारीरिक विकास में विलंब सहित अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों का चयन किया गया है। विशेषज्ञ अस्पतालों में इन बच्चों की जांच, सर्जरी एवं आवश्यक उपचार किया जाएगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
सीएचसी विक्रमपुर में पदस्थ डॉ. हर्षवर्धन सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश्य जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात दोष, बीमारियों, पोषण संबंधी समस्याओं और विकास संबंधी कमियों की समय पर पहचान कर उनका समुचित उपचार सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि कटे होंठ-तालु वाले बच्चों को सर्जिकल उपचार के लिए तथा हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को विशेषज्ञ अस्पतालों में भेजा गया है। वहीं सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चों की मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा विस्तृत जांच कर आगे की उपचार प्रक्रिया तय की जाएगी।
कार्यक्रम से जुड़े डॉ. ऋषिकेश ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत प्रत्येक विकासखंड में मोबाइल हेल्थ टीम गठित की गई है। प्रत्येक टीम में एक पुरुष एवं एक महिला स्वास्थ्यकर्मी शामिल रहते हैं, जो नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच करते हैं। जांच के दौरान गंभीर बीमारी के लक्षण मिलने पर बच्चों को आगे की जांच और उपचार के लिए रेफर किया जाता है।
उन्होंने बताया कि हृदय रोग की पुष्टि के लिए इको जांच कराई जाती है। यदि जांच में दिल में छेद या अन्य जन्मजात समस्या सामने आती है तो विशेषज्ञ चिकित्सक यह तय करते हैं कि उपचार दवाओं से संभव है या सर्जरी की आवश्यकता होगी। अन्य गंभीर बीमारियों का उपचार भी विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार किया जाता है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम जिले के हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है। समय पर बीमारी की पहचान, विशेषज्ञ उपचार और पूरी तरह निशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को नया जीवन मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग का यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने और हर बच्चे को स्वस्थ भविष्य देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।







