शहडोल। जोन पुलिस में अनुशासन पालन न करने पर तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। प्राप्त जानकारी अनुसार, यह कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक एन चैत्रा ने की है। संभवतः संभागीय पुलिस मुख्यालय से, यह पहली ऐसी कार्रवाई होगी, जहां एक वरिष्ठ अधिकारी ने अनुशासन पालन नहीं किए जाने पर दंडित किया हो। यह कार्रवाई लोगों के बीच चर्चा का विषय है और इस कार्रवाई की चंहूओर सराहना भी की जा रही है। बता दें कि, कर्तव्य में लापरवाही बरतने, गरिमा के प्रतिकूल आचरण करने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है।
जानकारी के अनुसार, पुलिस मुख्यालय भोपाल ने अप्रैल 2025 में एक आदेश जारी किया गया था, जिसके तहत उप पुलिस अधीक्षक से थानों के भ्रमण और बैठकों की जानकारी मांगी गई। शहडोल, उमरिया और अनूपपुर जिलों से यह जानकारी लंबे समय से लंबित थी और इसे आईजी कार्यालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया था।जब इस संबंध में आईजी चैत्रा ने जवाब-तलब किया, तो रीडर शाखा कर्मचारी न केवल जानकारी देने में विफल रहे। बल्कि, एक प्रधान आरक्षक वर्दी के बजाय जींस पहनकर उनक समक्ष उपस्थित हुए। उच्चाधिकारी के सामने इस तरह की वेशभूषा में आना पुलिस नियमावली और अनुशासन का गंभीर उल्लंघन माना गया है।
इन पर हुई कार्रवाई
प्रथम दृष्टया लापरवाही और अनुशासनहीनता पाए जाने पर आईजी ने सहायक उप निरीक्षक परवेज खान रीडर शाखा (अनूपपुर), आरक्षक गौरव सिंह (अनूपपुर) एवं प्रधान आरक्षक प्रवीण कुमार तिवारी (उमरिया), को निलंबित कर, जांच के आदेश जारी किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान इन सभी को उनके संबंधित जिलों के रक्षित केंद्र में संबद्ध कर किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि, इन कर्मचारियों को नियमानुसार निर्वाह भत्ता देय होगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी ने विकास पाण्डेय (एसडीओपी धनपुरी) को प्राथमिक जांच की जिम्मेदारी सौंपी है और 10 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिया है।