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मप्र आयुर्विज्ञान विवि में अंक बढ़ाने का खेल: 30 से ज्यादा विद्यार्थियों के रिजल्ट में टाइपिंग मिस्टेक का बहाना, ईसी बैठक में परिणाम सुधारने का प्रस्ताव

जबलपुर, यशभारत। पास -फेल के लिए पूरे मध्यप्रदेश में ख्याति प्राप्त कर चुकी मप्र आयुर्विज्ञान विवि जबलपुर में एक और कारनामा सामने आया है। दरअसल टाइपिंग मिस्टेक की आड़ में करीब 30 विद्यार्थियों के अंक बढ़ाए जाने का प्रस्ताव कार्यपरिषद की बैठक में पास किया गया है। हैरानी की बात यह है कि विवि के पास निजी कंपनी से लेकर शासकीय स्टाफ पर्याप्त है बाबजूद टाइपिंग मिस्टेक होना कई सवालों को खड़ कर रहा है। एक ओर विवि में यह चर्चा है कि किसी एक छात्र के परिणाम में टाइपिंग मिस्टेक होना माना जा सकता है लेकिन इतने ज्यादा विद्यार्थियों के टाइपिंग मिस्टेक होना गड़बड़ी की तरफ अंदेशा करता है।

कॉलेजों पर कार्रवाई क्यों नहीं
कॉलेजों द्वारा गलती की जा रही है और डॉक्टर बनाने की प्रक्रिया में ऐसी मिस्टेक होना बताता है कि यह सब जानबूझकर किया जा रहा है। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि टंकन मिस्टेक इतनी संख्या में होना यह बताता है कि पास-फेल के खेल को बेखूबी पूरी सांठगांठ से अंजाम दिया जा रहा है।

  • केस-1
    विवेकानंद पैरामेडिकल शहडोल के डीएमएलटी छात्र बैच 2018 की परीक्षा में शामिल हुआ था। अप्रैल 2022 में परिणाम जारी हुआ जिसमें पैथोलॉजी पेपर प्रथम विषया के प्रायोगिक अंक में विवि द्वारा टंकन त्रुटि के कारण 90 अंक के स्थान पर 43 अंकित हो गए हैं। उक्त प्रकरण में ईसी बैठक के जिम्मेदारों ने सुधार के लिए कहा है।
    केस-2
    एसएस मेडिकल कॉलेज रीवा द्वारा पत्र भेजा गया जिसमें एमडी फार्मलॉजी विषय के एक विद्यार्थी के प्रायोगिक अंक पोर्टल पर गलत प्रविष्ट कर दिए गए हैं। विवि द्वारा दिनांक 23 जुलाई 2022 को परिणाम घोषित किया गया है। जिसमें टंकन गलती हुई है।
    केस-3
    बीएम शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय शहडोल के द्वारा विवि को सूचित किया गया कि एमबीबीएस सेकंड फार्माकोलॉजी विषय की प्रायोगिक परीक्षा के 24 विद्यार्थियों के त्रुटिपूर्ण परिणाम बताए गए। कार्यपरिषद की बैठक में विवि प्रबंधन को रिजल्ट सुधारने के निर्देश दिए हैं।
    केस-4
    मेडिकल कॉलेज जबलपुर की छात्रा के एक प्रश्र पत्र एवं प्रायोगिक परीक्षा में अनपुस्थित थी परंतु परीक्षा परिणाम उक्त विषय के अंक त्रुटिवश अंकित हो गए हैं एवं इस विषय में ये उत्तीर्ण हो गई छात्रा का परीक्षा परिणाम फेल दिख रहा है। इस मामले में कार्यपरिषद की बैठक में परिणाम सुधारकर जारी करने को कहा गया।
    केस-5
    बीपीटी प्रथम वर्ष छात्रा प्रेमवती कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंस जबलपुर को बायोमेकिनिकल मॉडलिटस विषय के प्रश्र पत्र में अनुपस्थित दर्शाया गया। कहा जा रहा है कि इसकी जांच कराई गई तो यह भूलवश हुआ है। ऐसे मामलों में कार्यपरिषद की बैठक में प्रस्ताव पास कर सही परिणाम घोषित करने को कहा गया।
    केस-6
    श्याम शाह मेडिकल कॉलेज रीवा के एक विद्यार्थी द्वारा एमबीबीएस फाइनल पार्ट 2 के ऑनलाइन आवदेन में गलत नामांकन अंकित कर दिया गया। उक्त प्रकरण में गलत नामांकन अंकित किया गया सही नामांकन दर्ज कराने का निर्णय लिया गया और परिणाम जारी करने के निर्देश दिए गए।
    केस-7
    बंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी द्वारा एमबीबीएस फाइनल पार्ट-2 मई 2022 के ऑननलाइन परीक्षा आवेदन में त्रुटिपूर्ण नामांकन अंकित किया गया परंतु उत्तरपुस्तिका में सही नामांकन अंकित किया गया जिसकी वजह से परीक्षा परिणाम जारी नहीं हो सका। कार्यपरिषद ने निर्णय लेते हुए तय किया सुधार कर नए परिणाम जारी किए जाए।

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