भोपालमध्य प्रदेश

यशभारत ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाकर लापरवाही उजागर की थी 90 डिग्री में फ्लाईओवर का मोड़ मुख्यमंत्री ने 8 अफसरों को किया सस्पेंड

यशभारत ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाकर लापरवाही उजागर की थी
90 डिग्री में फ्लाईओवर का मोड़ मुख्यमंत्री ने 8 अफसरों को किया सस्पेंड

– भोपाल के ऐशबाग आरओबी निर्माण में गंभीर लापरवाही

यशभारत खबर का असर

भोपाल विजय शर्मा। राजधानी भोपाल में ऐशबाग के 90 डिग्री आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज) के निर्माण में सामने आई गंभीर लापरवाही पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने तत्काल प्रभाव से लोक निर्माण विभाग के 8 इंजीनियरों को निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने शनिवार रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए थे, और अब जांच रिपोर्ट के आधार पर यह बड़ी कार्रवाई की गई है। इस पूरे मामले को यशभारत भोपाल एडीशन ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था जिसके बाद सरकार ने इस पर एक्शन लिया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऐशबाग आरओबी के निर्माण में हुई गंभीर लापरवाही के मामले में संज्ञान लेकर जांच के आदेश दिए थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर लोक निर्माण विभाग के आठ इंजीनियर्स के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें दो मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) जीपी वर्मा और संजय खांडे, दो कार्यपालन यंत्री जावेद शकील और शबाना रज्जाक (डिजाइन), एक सहायक यंत्री शाबुल सक्सेना (डिजाइन), अनुभागीय अधिकारी रवि शुक्ला तथा उपयंत्री उमाशंकर मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, एक सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री एमपी सिंह के विरुद्ध विभागीय जांच प्रारंभ की जाएगी। इसी के साथ आरओबी का त्रुटिपूर्ण डिजाइन प्रस्तुत करने पर निर्माण एजेंसी एवं डिजाइन कंसल्टेंट – दोनों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कराई थी जांच, एनएचआई रिपोर्ट में सामने आई थी खामी
गौरतलब है कि लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह ने इस मामले में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ख18) से जांच करवाई थी। एनएचएआई ने अपनी रिपोर्ट में इस ब्रिज को लेकर गंभीर खामियां उजागर की थी। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया था कि पुल पर 35-40 किमी प्रति घंटा से अधिक गति से वाहन न चलाए जाएं, क्योंकि इससे अधिक स्पीड में गाड़ी चलाने पर हादसा होने का खतरा है। एनएचएआई की इस चौकाने वाली रिपोर्ट के बाद ही इस ब्रिज को रीडिजाइन करने का फैसला लिया गया है। हालांकि, इस पूरे मामले पर अधिकारी अभी भी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के इस त्वरित और कड़े कदम ने यह साफ कर दिया है कि निर्माण कार्यों में गुणवता से कोई समझौता नहीं होगा।
इन पर हुई कार्रवाई
जीपी वर्मा, मुख्य अभियंता
संजय खाडे, मुख्य अभियंता
जावेद शकील, कार्यपालन यंत्री
शबाना रज्जाक, कार्यपालन यंत्री डिजाइन
शाबुल सक्सेना, सहायक यंत्री डिजाइन
उमाशंकर मिश्रा, उपयंत्री
रवि शुक्ला, उपयंत्री
एमपी सिंह, सेवानिवृत अधीक्षण यंत्री
दो सीई सहित सात इंजीनियर सस्पेंड, एक सेवानिवृत्त पर जांच
मुख्यमंत्री के निर्देश पर, लोक निर्माण विभाग के दो चीफ इंजीनियर सहित सात इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक सेवानिवृत्त सुपरिटेंडेंट इंजीनियर के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाएगी। यह कार्रवाई बताती है कि सरकार गुणवत्ता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करना चाहती।
निर्माण एजेंसी और डिज़ाइन कंसल्टेंट ब्लैकलिस्ट
इस मामले में सिर्फ अधिकारियों पर ही गाज नहीं गिरी है। आरओबी का त्रुटिपूर्ण डिजाइन प्रस्तुत करने के लिए निर्माण एजेंसी और डिजाइन कंसल्टेंट, दोनों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। यह फैसला भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए एक कड़ा संदेश है। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की है कि आरओबी में आवश्यक सुधार के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पुल में आवश्यक सुधार नहीं हो जाते, तब तक इसका लोकार्पण नहीं किया जाएगा।

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