
यशास एफ.आर.पी. मैन्युफैक्चरिंग पर 3.57 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला दर्ज
बैंक ऑफ बड़ौदा व म.प्र. औद्योगिक केंद्र विकास निगम को आर्थिक क्षति
इंदौर। यशास एफ.आर.पी. मैन्युफैक्चरिंग एलएलपी एवं उसके संचालकों के विरुद्ध बैंक ऑफ बड़ौदा और मध्यप्रदेश औद्योगिक केंद्र विकास निगम के साथ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी एवं ऋण के दुरुपयोग के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। प्राथमिक जांच में कुल 3 करोड़ 57 लाख 95 हजार 442 रुपये की आर्थिक क्षति सामने आई है।
जानकारी के अनुसार यशास एफ.आर.पी. मैन्युफैक्चरिंग एलएलपी द्वारा वर्ष 2013 से 2015 के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा, शाखा सियागंज से टर्म लोन, वर्किंग कैपिटल, कैश क्रेडिट एवं एक्सपोर्ट पैकेजिंग क्रेडिट के तहत कुल 11.05 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत कराया गया था। जांच में पाया गया कि इस ऋण राशि का उपयोग निर्धारित व्यावसायिक गतिविधियों में न करते हुए बड़े पैमाने पर नकद आहरण किया गया तथा प्रमोटर खातों व अन्य फर्मों में अवैधानिक रूप से अंतरण किया गया।
फॉरेंसिक ऑडिट में यह भी सामने आया कि निर्यात के लिए स्वीकृत 2.95 करोड़ रुपये की राशि के विरुद्ध कोई निर्यात नहीं किया गया। इसके अतिरिक्त, टर्म लोन से खरीदी गई सीएनसी स्ट्रक्चरल एफ.आर.पी. एक्सट्रूडर मशीन, जो बैंक के पास बंधक थी, को बैंक की अनुमति के बिना विक्रय कर दिया गया और विक्रय से प्राप्त राशि ऋण खाते में जमा नहीं की गई।
जांच में यह भी पाया गया कि आरोपियों द्वारा बैंक को सूचित किए बिना अन्य बैंकों में करंट खाते खोलकर ऋण राशि का दुरुपयोग किया गया। वहीं, म.प्र. औद्योगिक केंद्र विकास निगम, इंदौर से आवंटित भूमि के एवज में 4,95,442 रुपये की लीज रेंट जमा नहीं की गई, जिससे निगम को आर्थिक क्षति हुई।
वन-टाइम सेटलमेंट के पश्चात बैंक ऑफ बड़ौदा को 3.53 करोड़ रुपये तथा म.प्र. औद्योगिक केंद्र विकास निगम को लीज रेंट की राशि मिलाकर कुल 3,57,95,442 रुपये की हानि होना प्रमाणित हुई है।
प्राथमिक जांच के आधार पर मेसर्स यशास एफ.आर.पी. मैन्युफैक्चरिंग एलएलपी, इसके संचालक संजय गुप्ता एवं शालिनी गुप्ता के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420 एवं 120-बी के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ कर दी गई है।






