
यश भारत एक्सक्लूसिव, राइट टाउन प्रॉपर्टी विवाद में बड़ा फैसला, लीज निरस्त, जमीन निगम के अधिपत्य में
जबलपुर, यश भारत। राइट टाउन स्थित प्रेम मंदिर के पास की बेशकीमती जमीन को लेकर चल रहे विवाद में अब नगर निगम ने बड़ा और अंतिम कदम उठाते हुए लीज निरस्त कर दी है। नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के आदेश पर संबंधित लीज को औपचारिक रूप से रद्द कर दिया गया है और जमीन को नगर निगम के आधिपत्य में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यह मामला राइट टाउन निवासी डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की मृत्यु के बाद सामने आया था। प्रशासन द्वारा प्रॉपर्टी को लेकर दावा प्रस्तुत करने के लिए 24 घंटे का नोटिस चस्पा किया गया था, लेकिन तय समय सीमा में कोई भी पक्ष दस्तावेजों के साथ सामने नहीं आया।
नगर निगम आयुक्त के निर्देश पर उपायुक्त शिवांगी महाजन द्वारा तैयार की गई जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट में लीज शर्तों के कई उल्लंघन पाए जाने के बाद लीज निरस्तीकरण का प्रस्ताव आयुक्त के समक्ष रखा गया था, जिसे स्वीकृति मिलते ही आदेश जारी कर दिए गए।
लीज शर्तों के उल्लंघन पर कार्रवाई
नगर निगम सूत्रों के अनुसार, जबलपुर नगर निगम की लीज पर स्थित प्लॉट क्रमांक 51, राइट टाउन की कुल भूमि 25,047 वर्गफीट है। रिकॉर्ड में पट्टेधारी के रूप में डॉ. हेमलता के पति, ससुर और पुत्र के नाम दर्ज थे।
जांच में सामने आया कि वर्ष 2020-21 से लीज भू-भाड़ा जमा नहीं किया गया था। इसके अलावा लीज की शर्त क्रमांक 3, 6, 7 और 8 का उल्लंघन किया गया। विशेष रूप से बिना नगर निगम की अनुमति के दानपत्र और वसीयत के जरिए जमीन हस्तांतरित करने की प्रक्रिया को गंभीर उल्लंघन माना गया।
नगर निगम का स्पष्ट मत है कि लीज शर्त क्रमांक 6 के तहत निगम को जमीन पर पुनः प्रवेश का अधिकार सुरक्षित है, जिसके आधार पर अब लीज निरस्त कर दी गई है।
नगर निगम अपने आधिपत्य में लेगा जमीन
नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने कहा कि लीज की जमीन को दानपत्र और वसीयत के माध्यम से हस्तांतरित करने के लिए नगर निगम से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। यह सीधे तौर पर लीज शर्तों का उल्लंघन है। अपर आयुक्त द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट के आधार पर लीज निरस्त कर दी गई है और अब जमीन को नगर निगम अपने आधिपत्य में लेगा।
क्या था पूरा मामला
डॉ. हेमलता के पति और पुत्र की मृत्यु के बाद जमीन के एक हिस्से को लेकर दान और वसीयत की प्रक्रिया की गई थी। करीब 11 हजार वर्गफीट भूमि का एक हिस्सा डॉ. सुमित जैन और प्राची जैन को दान में दिया गया था, जबकि लगभग 14 हजार वर्गफीट भूमि की वसीयत एक धार्मिक संस्था के नाम की गई थी।
इसी को लेकर आपसी विवाद खड़ा हुआ था और मामला प्रशासन तक पहुंचा। अब किसी भी पक्ष द्वारा दावा प्रस्तुत नहीं किए जाने और लीज शर्तों के उल्लंघन की पुष्टि के बाद नगर निगम ने लीज निरस्त करते हुए जमीन को अपने नियंत्रण में लेने का निर्णय लागू कर दिया है।







