यश भारत, संपादकीय,सड़क सुरक्षा पखवाड़े में शून्य दुर्घटना का संकल्प
मध्य प्रदेश के मिनी मुंबई में नो-एंट्री के दौरान बेहद भयावह दुर्घटना घटित हुई

यश भारत, संपादकीय
सड़क सुरक्षा पखवाड़े में शून्य दुर्घटना का संकल्प
मध्य प्रदेश के मिनी मुंबई में नो-एंट्री के दौरान बेहद भयावह दुर्घटना घटित हुई
किसी भी दुर्घटना के घट जाने के पश्चात सरकारों और सरकारी यातायात प्रबंधन मुठ्ठीभर दिखाई देता है। फिर कुछ दिनों के बाद सुविधाएं में छाए रहने वाले सड़क दुर्घटनाओं के मामले में चिंता से बाहर हो जाते हैं। यही स्थिति में प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा दिखाए गए हृदय विदारक चित्र ने लोगों को झकझोर कर रख दिया…। सड़क सुरक्षा पखवाड़ा चल रहा है और इसी दौरान इंदौर में बेहद भयावह सड़क हादसा हुआ।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में कुल सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। हालांकि, नो-एंट्री उल्लंघन से जुड़ी विशिष्ट दुर्घटनाओं का अलग से आंकड़ा उपलब्ध तो नहीं है, परंतु यह सच है कि नो-एंट्री समय एवं पीक-टाइम भारी वाहनों से जुड़ी पाई गई दुर्घटनाओं में इजाफा हुआ है।
भारत में वर्ष 2022 में कुल 4,61,312 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 1,68,491 मौतें और 4,43,366 घायल हुए। मध्य प्रदेश में कुल 13,427 मौतें दर्ज हुईं। दुर्घटनाओं का और विश्लेषण करने पर पाया गया कि शहरी क्षेत्रों भोपाल, इंदौर, जबलपुर में रात्रिकालीन दुर्घटनाएं सर्वाधिक थीं। 30–35% दुर्घटनाएं नो-एंट्री उल्लंघन से जुड़ी पाई गईं। 2023 में भारत में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या बढ़कर लगभग 4,50,000 दर्ज की गई। इनमें लगभग मौतें 1,73,000 हुईं तथा मध्य प्रदेश में पर 196 मौतें दर्ज।
मुद्दा यही है कि दुर्घटनाओं को शून्य करने का संकल्प लिया जाए। मध्य प्रदेश में ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित कर दुर्घटनाओं को 20% घटाने का लक्ष्य है। इंदौर सहित प्रमुख शहरों में रात्रिकालीन दुर्घटनाओं में 25% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इंदौर में रविवार रात को जो हादसा हुआ, वह दिल दहला देने वाला था। इंदौर शहर में दुर्घटनाएं मुख्यतः तेज रफ्तार, नशे में ड्राइविंग और नो-एंट्री उल्लंघन से होती हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक 18 से 45 आयु वर्ग के 70% लोग सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं।
एयरपोर्ट रोड (शिक्षक नगर, बड़ा गणपति क्षेत्र) पर शाम 7 बजे एक ट्रक ने नो-एंट्री का उल्लंघन करने नशे में धुत होकर भीड़ में 15 लोगों और कई वाहनों को रौंदा, ट्रक में आग लग गई। हेलमेट, तस्वीरें सामने आईं जिसमें ट्रक के आगे वाले पहियों के नीचे एक व्यक्ति के जिंदा जल जाने की घटना सामने आई।
यह सच है कि इंदौर में बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम हटाने से दुर्घटनाएं 70% घटीं, किंतु यातायात के कुप्रबंधन के कारण बढ़ी भी हैं। इंदौर शहर में सड़क सुरक्षा पखवाड़े के दौरान ऐसा भयावह हादसा होना गहरी चिंता का विषय है।
जरूरत इस बात की है कि एयरपोर्ट रोड पर नो-एंट्री के समय ट्रक का प्रवेश कैसे हो गया। यहां पुलिस की बड़ी जिम्मेदारी बनती है। यदि सड़क सुरक्षा पखवाड़े में ही ऐसी घटनाएं होंगी तो फिर शून्य दुर्घटना का संकल्प कैसे पूरा होगा?
सरकार और पुलिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि नो-एंट्री और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन हो। प्रश्न यही है कि जब सड़क सुरक्षा पर करोड़ों रुपए खर्च होते हैं, पुलिस इकाइयां इसे लागू करने में लगी होती हैं तो फिर भी ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं? आखिर कब तक सड़क सुरक्षा के संकल्प को अनदेखा किया जाएगा?






