होटल व्यवसायी को फंसाने के पीछे आखिर किसका षडय़ंत्र ?- माधवनगर में चर्चाएं : खेल के पीछे कहीं शातिर दिमाग अपराधी तो नहीं

- यशभारत की पड़ताल में उजागर हुए कई बिन्दु, जांच करे पुलिस तो होंगे बड़े खुलासे
बहुचर्चित रोहित चंचलानी हत्याकांड
कटनी, यशभारत। माधवनगर के बहुचर्चित रोहित चंचलानी हत्याकांड में पीड़ित पक्ष द्वारा होटल व्यवसायी प्रकाश आहूजा पर लगाए गए गंभीर आरोपों की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक अभिनव विश्वकर्मा द्वारा सीएसपी नेहा पच्चीसिया के नेतृृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है। एसआईटी ने इस मामले की जांच भी शुरू कर दी है। पीडि़त पक्ष की ओर से मृतक रोहित चंचलानी की बहन कशिश चंचलानी ने होटल व्यवसायी प्रकाश आहूजा पर उसके भाई की हत्या करवाने, एक स्थानीय नेता पर होटल व्यवसायी को संरक्षण देने के साथ ही माधवनगर पुलिस पर पूरे मामले में होटल व्यवसायी को बचाने का आरोप लगाया था।
यशभारत ने जब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बिन्दुवार तथ्यों का बारीकी से अवलोकन किया तो कई तथ्य उभरकर सामने आए हैं। यदि पुलिस इन बिन्दुओं पर जांच करे तो जल्द ही किसी नतीजे पर पहुंचेगी। यशभारत का उद्देश्य हर हाल में सच को सामने लाना है।

यह घटना 20 जून को माधवनगर में उस समय घटित हुई थी, जब मानसरोवर कॉलोनी 28 वर्षीय रोहित चंचलानी पिता संचिदानंद अपने दोस्त शुभम वाधवानी के साथ 20 जून की रात 8.30 बजे मां प्रिया चंचलानी की दवाई लेने के लिए निकला था। जब वह नारायण शाह मेडिकल पहुंचा, तभी दीपक मोटवानी, मोहित धामेचा, मुकेश आडवानी, आकाश पोपटानी पहुंचे और रोहित के साथ मारपीट करने लगे। मारपीट में घायल युवक की जबलपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस मामले में माधवनगर पुलिस ने दीपक मोटवानी, मोहित धमेचा, आकाश पोपटानी व महेश आडवानी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी भी की। इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मृतक की बहन कशिश चंचलानी ने एसपी के नाम एक शिकायती आवेदन देकर होटल व्यवसायी प्रकाश आहूजा को इस घटना का मास्टर माइंड बताते हुए हत्या का मामला दर्ज किए जाने की मांग की। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है। अगर प्रकाश आहूजा आरोपी है, तो निश्चित रूप से उसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए लेकिन अगर प्रकाश आहूजा आरोपी नहीं है तो एक संगठित अपराधिक गिरोह द्वारा अपनी हफ्ता वसूली और दहशत कायम रखने के लिए किसी निर्दोष को फंसाने के लिए दोषी सारे लोगों पर ही उतनी ही कड़ी कार्रवाई होना चाहिए।

इन बिन्दुओं पर हो जांच, तो सच्चाई आएगी सामने…
इस पूरे घटनाक्रम में सच को सामने लाने के लिए ऐसे कुछ बिंदुओं की जांच जरूरी है, जिससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। अपनी पड़ताल के बाद यह सारे तथ्य यशभारत न सिर्फ कटनी की जनता बल्कि पुलिस प्रशासन के समक्ष सामने ला रहा है। घटनाक्रम में शराब दुकान के सामने मृतक रोहित को पकडऩा बताया जा रहा है। जाहिर है शराब दुकान के कैमरे पुलिस के पास है, लेकिन उसकी जांच क्यों नहीं की जा रही। रोहित की बहन कशिश बता रही है कि भाई ने मौत से पहले उसे इस बारे में बताया था। सवाल यह उठता है कि गवर्नमेंट हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज की वीडियो रिकॉर्डिंग क्यों नहीं ली जा रही, ताकि यह पता चल सके कि भाई द्वारा बहन को कान में बताने जैसी कोई बात हुई है कि नहीं। दूसरा बिंदु यह है कि मारपीट के बाद रोहित को कमल ज्वेलर्स के पास गिरना बताया जा रहा है। ऐसे में यह भी सवाल है कि कमल ज्वेलर्स के कैमरे और पुलिस द्वारा खून की जब्ती इत्यादि किस स्थल पर की गई। इन बिंदुओं की जांच से स्पष्ट हो सकेगा कि घटनास्थल यही था। जांच का महत्वपूर्ण बिंदु यह भी हो सकता है कि कमल ज्वेलर्स के सामने दीपक मोटवानी द्वारा रोहित को पत्थर मारना बताया गया है। ऐसी स्थिति में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से इसका मिलान क्यों नहीं किया जा रहा। एफआईआर में सिर्फ यह कहा गया है कि प्रकाश आहूजा के लड़कों ने मारा, जबकि प्रकाश आहूजा ने मरवाया, यह कहीं नहीं लिखवाया गया है। अगर कशिश का आरोप यह है कि एफआईआर सही नहीं लिखी गई तो एफआईआर के वक्त की कैमरा रिकॉर्डिंग क्यों नहीं चेक की जा रही। घायल रोहित को 11.30 बजे शासकीय अस्पताल पहुंचाना बताया गया है, जाहिर है वास्तविक स्थिति अस्पताल के कैमरे से स्पष्ट हो जाएगी। घटना की एफआईआर में उल्लेख है कि शुभम ने फोन करके कशिश को घटना के बारे में बताया था। इस बिंदु की सच्चाई जानने पुलिस द्वारा कॉल डिटेल क्यों नहीं निकलवाई जा रही।

गवाहों के अपराधिक रिकार्ड की हो जांच
सूत्र कहते हैं कि घटना में जिन गवाहों का नाम रोहित की बहन कशिश द्वारा बताया जा रहा है, उनके आपराधिक रिकार्ड की जांच क्यों नहीं की जा रही। सवाल यह है कि आसपास के कैमरों और अस्पताल समेत मेडिकल कॉलेज कैमरों से क्या उनकी उपस्थिति सुनिश्चित हो रही है और इन सब की भी कॉल डिटेल के अलावा कशिश सहित इन सभी गवाहों की मोबाइल की लोकेशन भी पुलिस द्वारा अब तक क्यों नहीं निकलवाई जा रही। पड़ताल में यह तथ्य भी सामने आया है कि पुराने वीडियो में पहले प्रकाश आहूजा का नाम नहीं लिया गयाए बाद में प्रकाश आहूजा का नाम जोड़ दिया गया। घटना के बाद से ही फरार अपराधी विनय वीरवानी के पिता लगातार प्रकाश आहूजा का नाम ले रहे हैं, लेकिन अब वही पुलिस को गवाही देने क्यों नहीं जा रहे। जाहिर है विनय वीरवानी के पिता घटनास्थल पर थे या ही नहीं, इसकी जांच होना चाहिए, क्योंकि एक वीडियो में वह यह कहते देखे जा रहे हैं कि चाकू इत्यादि लेकर मारा गया है, जबकि अन्य गवाह कहीं भी यह नहीं कह रहे हैं।

क्या पुलिस ने निकाली प्रकाश आहूजा की कॉल डिटेल
इस मामले में यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि व्यवसाई प्रकाश आहूजा की कॉल डिटेल पुलिस द्वारा निकाली गई या नहीं। कशिश एक चैनल को दिए में इंटरव्यू में कह रही है कि एंबुलेंस के पास मुझे बताया कि किन-किन लोगों ने रोहित को मारा और मरवाया। वीडियो रिकॉर्डिंग से स्पष्ट हो जाएगा कि एंबुलेंस में जब उसको ले जाया जा रहा था, तब वह लड़की वहां थी या नहीं।

एसआईटी गठित होने के बाद भी लगाए जा रहे आरोप
शिकायतकर्ता कशिश चंचलानी बिना किसी जांच के प्रकाश आहूजा की गिरफ्तारी चाहती है, जबकि इस मामले में एसआईटी का गठन हो चुका है। इस केस की एफआईआर में सिर्फ इतना उल्लेख है कि रोहित को प्रकाश आहूजा के लड़कों ने मारा लेकिन इसके बाद कई बार अलग-अलग बयान दिए गए। ऐसी स्थिति में पुलिस को विनय वीरवानी के पिता की भी मोबाइल लोकेशन के साथ कॉल डिटेल भी निकलवाना चाहिए। इस बात की जांच भी होना चाहिए कि एफआईआर देर से क्यों कराई गई। क्या पहले पूरी एक स्टोरी बनाई गई, जो घटना के तुरंत बाद बनाए गए वीडियो में सामने आए बयानों की विरोधाभासी है। आशंका जाहिर की जा रही है कि इस पूरे खेल में कहीं एक शातिर दिमाग अपराधी का षडय़ंत्र तो नहीं, जिसकी महीने में 25 से 50 लाख की वसूली का नेटवर्क माधवनगर बंद और पुलिस की कार्यवाही से ध्वस्त हो गया हो।

पुलिस की पकड़ से दूर राहुल बिहारी को किसका संरक्षण
गौरतलब है कि राहुल बिहारी आज भी पुलिस की पकड़ से बाहर है और जिस तरह से सारा घटनाक्रम अंजाम दिया जा रहा है, उससे स्पष्ट है कि वह न सिर्फ पेशेवर अपराधी है, बल्कि उसके पीछे कहीं ना कहीं राजनीतिक संरक्षण और पुलिसिया एक्सपर्ट दिमाग भी काम कर रहा है। यही कारण है कि आज तक पुलिस डिपार्टमेंट उसकी कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन पता नहीं कर पाया। एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत अगर किसी अपराधी को माधवनगर और आसपास के क्षेत्र से अवैध पेकारीए क्रिकेट सट्टे एवं अवैध खनन की 25 से 50 लाख की अवैध वसूली रोकने के प्रयास के कारण किसी को फंसाने की कोशिश है तो इसकी सही स्थिति जनता के सामने आना चाहिए। जाहिर है इस पर रोक नहीं लगी तो कल इन अपराधियों को रोकने कौन व्यापारी, कौन नेता खड़ा होने का साहस कर पाएगा।
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