जहां दूल्हा बनते हैं महाकाल: उज्जैन की रहस्यमयी शिव नवरात्रि, जो देश में सिर्फ यहीं मनाई जाती है
शिव नवरात्रि के पहले दिन कोटेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक शुरू

उज्जैन,यशभारत। हिंदू धर्म में नवरात्रि आस्था, शक्ति और साधना का महापर्व मानी जाती है। आमतौर पर देशभर में साल में चार नवरात्रियां मनाई जाती हैं, लेकिन धार्मिक नगरी उज्जैन में एक ऐसी अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जो इसे पूरे भारत में अलग पहचान दिलाती है। यहां महाशिवरात्रि से पहले विशेष शिव नवरात्रि मनाई जाती है, जिसमें भगवान महाकाल को दूल्हे के रूप में सजाया जाता है।
विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में तीसरे स्थान पर माना जाता है, अपनी विशिष्टताओं के लिए जाना जाता है। यह एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जो स्वयंभू है और दक्षिणमुखी भी। शिप्रा नदी के पावन तट पर स्थित यह मंदिर न सिर्फ श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि कुंभ जैसे विराट धार्मिक आयोजनों का साक्षी भी रहा है।
शिव विवाह से जुड़ी है शिव नवरात्रि की परंपरा
महाकाल मंदिर के पुजारी पं. महेश शर्मा बताते हैं कि मान्यता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस विवाह से ठीक नौ दिन पहले उज्जैन में शिव नवरात्रि का आयोजन होता है। यह परंपरा पूरे देश में केवल महाकालेश्वर मंदिर में ही देखने को मिलती है।
इन नौ दिनों के दौरान भगवान महाकाल पर चंदन का लेप किया जाता है, उन्हें मेहंदी लगाई जाती है और विशेष शृंगार के साथ अभिषेक, पूजन व अनुष्ठान संपन्न होते हैं। हर दिन बाबा महाकाल भक्तों को अलग-अलग स्वरूप में दर्शन देते हैं।
साल में एक बार सजते हैं बाबा दूल्हे के रूप में
शिव नवरात्रि के अंतिम दिन महाकाल को सेहरा पहनाकर दूल्हे के रूप में सजाया जाता है। जिस तरह विवाह में परिवार उत्सव मनाता है, उसी तरह पूरी उज्जैन नगरी शिव विवाह के उल्लास में डूब जाती है। यह परंपरा अवंतिका नगरी के धार्मिक महत्व को और भी गहराई देती है।
अवंतिका में पांच बार क्यों मनाई जाती है नवरात्रि
उज्जैन की अवंतिका नगरी में माता हरसिद्धि का शक्तिपीठ भी स्थित है, जो 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां शिव और शक्ति दोनों का वास होने के कारण माता की नवरात्रि के साथ-साथ शिव नवरात्रि की परंपरा भी निभाई जाती है। यही वजह है कि उज्जैन में नवरात्रि का पर्व साल में पांच बार विशेष रूप से मनाया जाता है।
शिव नवरात्रि के दर्शन का विशेष फल
मान्यता है कि जो श्रद्धालु इन नौ दिनों के भीतर महाकाल के दर्शन और पूजन करता है, उसे महाशिवरात्रि के समान पुण्य प्राप्त होता है। कई भक्त इस दौरान व्रत रखते हैं और अपनी मनोकामनाएं लेकर बाबा के दरबार में पहुंचते हैं।
उज्जैन की शिव नवरात्रि न सिर्फ एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह परंपरा आस्था, संस्कृति और शिव-भक्ति का ऐसा संगम है, जो इसे पूरे देश में अद्वितीय बनाता है।






