267 दुकानों के लिए रिजर्व प्राइस में 40% तक कटौती – कल खुलेगा 18वां टेंडर

267 दुकानों के लिए रिजर्व प्राइस में 40% तक कटौती
– कल खुलेगा 18वां टेंडर
भोपाल। मध्यप्रदेश में शराब दुकानों के आवंटन को लेकर आबकारी विभाग को अब भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 17 चरणों की नीलामी के बाद भी प्रदेश की 267 शराब दुकानें अब तक आवंटित नहीं हो सकी हैं। ठेकेदारों की कम रुचि को देखते हुए आबकारी विभाग ने इन दुकानों की रिजर्व प्राइस में कटौती की सीमा 35 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि छूट बढ़ने के बाद आगामी दौर में ठेकेदार आगे आएंगे।
प्रदेश में शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया लगातार जारी है। अब तक 3553 दुकानों में से 3286 दुकानों का आवंटन किया जा चुका है, जबकि 267 दुकानें अभी भी खाली हैं। विभाग सोमवार को होने वाले 18वें दौर की ई-टेंडर प्रक्रिया में इन दुकानों के आवंटन के लिए पूरी ताकत लगाएगा।
घाटे का सौदा मान रहे कारोबारी
शराब कारोबार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बची हुई दुकानों को बाजार में घाटे वाली दुकानें माना जा रहा है। यही कारण है कि रिजर्व प्राइस में पहले 35 प्रतिशत तक कटौती के बावजूद भी ठेकेदारों ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। हाल ही में हुए 16वें और 17वें चरण में कुल 384 दुकानों के लिए टेंडर जारी किए गए थे, लेकिन इनमें से केवल 117 दुकानें ही आवंटित हो सकीं।
17वें चरण में तो स्थिति और भी कमजोर रही। इस दौर में सिर्फ 25 दुकानें ही करीब 106 करोड़ रुपये में नीलाम हो पाईं, जबकि इन दुकानों की कुल रिजर्व प्राइस 162.21 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी।
आबकारी विभाग खुद चला रहा कई दुकानें
नए वित्त वर्ष की शुरुआत एक अप्रैल से हो चुकी है, लेकिन कई दुकानों के ठेके न होने के कारण फिलहाल उनका संचालन आबकारी विभाग के कर्मचारियों को ही करना पड़ रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द सभी दुकानों का आवंटन कर राजस्व बढ़ाया जाए।
राजस्व लक्ष्य से पीछे सरकार
पिछले वर्ष शराब से राज्य सरकार को लगभग 16,627 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था, जबकि इस वर्ष सरकार ने 19,952 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है। अभी तक करीब 17,435 करोड़ रुपये की आमदनी हो चुकी है, लेकिन लक्ष्य से लगभग 1,345 करोड़ रुपये पीछे है।







