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BLO पर बढ़ा असहनीय दबाव: 19 दिनों में 15 मौतें, MP सबसे अधिक प्रभावित बीमारियों का सिलसिला जारी 

डिजिटल टारगेट अधर में

BLO पर बढ़ा असहनीय दबाव: 19 दिनों में 15 मौतें, MP सबसे अधिक प्रभावित बीमारियों का सिलसिला जारी 

डिजिटल टारगेट अधर में

जबलपुर यश भारत। देशभर में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) अभियान ने बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की सेहत और सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है। केवल 19 दिनों में 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 15 BLO अपनी जान गंवा चुके हैं। मध्य प्रदेश में हालात सबसे भयावह हैं—यहाँ 4 मौतें दर्ज हुई हैं, जबकि भोपाल में ही पिछले 4 दिनों में 50 से अधिक BLO बीमार पड़े हैं।

भोपाल के दो BLO को हार्ट अटैक, एक को ब्रेन हेमरेज और कई को अत्यधिक काम के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। वहीं पश्चिम बंगाल में एक महिला BLO ने कार्यभार और दबाव से परेशान होकर आत्महत्या कर ली।

19 दिनों में 15 मौतें,MP सबसे अधिक प्रभावित

4 नवंबर से शुरू हुए इस अभियान में देशभर के BLO घर-घर जाकर गणना पत्रक वितरित कर रहे हैं, भरवा रहे हैं और उन्हें डिजिटल पोर्टल पर अपलोड कर रहे हैं। परंतु टारगेट इतना बड़ा है कि मौत और बीमारियों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

राज्यों में स्थिति इस प्रकार है—

मध्य प्रदेश: 4 मौतें
गुजरात: 4 मौतें
पश्चिम बंगाल: 3 मौतें (1 आत्महत्या)
राजस्थान: 2 मौतें
केरल व तमिलनाडु: 1-1 मौत

एमपी में 65,000 BLO को 5.35 करोड़ मतदाताओं के डेटा की पुष्टि करनी है। परंतु अब तक केवल 51% फॉर्म ही डिजिटल अपलोड हो पाए हैं। शेष 2.6 करोड़ फॉर्म को सिर्फ 12 दिनों में अपलोड करना है ,अभियान की यह रफ्तार लगभग दोगुना करने जैसी चुनौती है।

इस बीच 35 लाख मतदाता ‘लापता’ सूची में हैं, जिन्हें कम से कम तीन बार घर जाकर तलाशना अनिवार्य है।

BLO पर दबाव क्यों टूटा? ये 4 कारण भारी पड़ रहे हैं

1. काम का पहाड़, समय बेहद कम
गणना पत्रक देर से छपकर आए, जिससे काम आखिरी दिनों में एक साथ बढ़ गया। कई BLO को 1,200 से 1,500 मतदाताओं के घर तीन-तीन बार जाना पड़ रहा है।

2. तकनीकी खराबी का संकट
BLO ऐप बार-बार क्रैश हो रहा है। फोटो अपलोड नहीं होती, सर्वर डाउन रहता है और डिजिटल एंट्री में घंटों लग जाते हैं।

3. कार्रवाई की धमकी
टारगेट न मिलने पर नोटिस और सस्पेंशन का डर BLO को मानसिक रूप से तोड़ रहा है। भोपाल में अब तक कई BLO और सुपरवाइजर पर कार्रवाई की जा चुकी है।

4. बेहद कम वेतन
महीने भर की इस कठिन ड्यूटी में BLO को केवल ₹2,000 भत्ता और सुपरवाइजर को ₹1,500 मिलते हैं जिम्मेदारी के मुकाबले यह राशि नगण्य है।

मौतों की दर्दनाक कहानियाँ

रायसेन: रमाकांत पांडे लगातार चार रातों से जागकर काम कर रहे थे। ऑनलाइन मीटिंग के दौरान गिर पड़े और उनकी मौत हो गई।
दमोह: सीताराम गोंड फॉर्म भरते समय अचानक बीमार हुए और चल बसे।
दतिया: उदयभान सिहारे ने लक्ष्य के दबाव के चलते आत्महत्या कर ली।
भोपाल: दो BLO को हार्ट अटैक और कई अन्य अस्पताल में भर्ती।
रायसेन: नारायण सोनी छह दिनों से लापता, परिवार का कहना ,निलंबन के डर से मानसिक तनाव में थे।

अब आगे क्या? BLO समाधान मांग रहे, आयोग चुप

चुनाव आयोग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। परंतु BLO संगठनों ने मांग की है

टारगेट बढ़ाया जाए
ऐप की तकनीकी खामियाँ दुरुस्त होंभत्ते बढ़ाए जाएँ
नोटिस और सस्पेंशन की कार्रवाई रोकी जाए

डिजिटल अपलोड की अंतिम तिथि नज़दीक है, लेकिन सवाल यह है कि क्या BLO की जान जोखिम में डालकर यह लक्ष्य हासिल करना वाजिब है? लोकतंत्र की नींव पर खड़ा यह सिस्टम, उन्हीं लोगों की सेहत पर भारी पड़ता दिख रहा है जो इसे मजबूत रखने में जुटे हैं।

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