संस्कारधानी में परंपरागत चंडी मेला की शुरुआत
गढा गुलौआ मैं बुधवार को लगा मेला दिखा लोक परंपरा, श्रद्धा और मनोरंजन का संगम

जबलपुर यश भारत। दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के बाद अब संस्कारधानी जबलपुर में परंपराओं का उल्लास लौट आया है। शहर और आसपास के ग्रामीण अंचलों में चंडी मेला और मड़ई का दौर शुरू हो गया है। यह सिलसिला अब मकर संक्रांति तक चलता रहेगा। बुधवार को इसकी शुरुआत गढा गुलौआ स्थित चौक से गौतम जी की मढ़िया परिसर में आयोजित पारंपरिक चंडी मेले से हुई।
भीड़भाड़ और उल्लास से गूंजा मेला परिसर
शहरवासियों ने देर रात तक मेले का आनंद उठाया। चंडी मेला में पारंपरिक मिठाइयों, मनिहारी वस्तुओं, खिलौनों और झूलों के साथ ही खाने-पीने की विभिन्न दुकानों पर भीड़ लगी रही। महिलाओं और बच्चों ने जमकर खरीदारी की। मेले के दौरान आसपास के इलाकों में त्योहार जैसा माहौल देखने को मिला।
ग्वालों की टोलियों ने नृत्य से बांधा समा
मेले की सबसे खास झलक ग्वालों की पारंपरिक टोलियों का नृत्य रहा। परंपरागत वेशभूषा में सजे ग्वालों ने नाचते-गाते हुए पूरे परिसर को धार्मिक और सांस्कृतिक रंगों में रंग दिया। स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्था संभाली।
लोक परंपरा और आधुनिकता का संगम
चंडी मेला और मड़ई न केवल धार्मिक आयोजन हैं, बल्कि यह लोक संस्कृति और सामुदायिक एकता का प्रतीक बन चुके हैं। यहां परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम दिखाई देता है — जहां एक ओर ग्रामीण संस्कृति की झलक मिलती है, वहीं आधुनिक आकर्षण भी मौजूद रहते हैं।
जनवरी तक जारी रहेगा सिलसिला
चंडी मेला की शुरुआत के साथ ही अब शहर के अन्य हिस्सों — जैसे हनुमानताल, अधारताल, सुहागी महाराजपुर अमखेरा कुदवारी खमरिया,पिपरिया बेलखेड़ा, शहपुरा, पाटन और भेड़ाघाट क्षेत्र में भी आने वाले दिनों में इसी तरह के आयोजन होंगे। ग्रामीण अंचलों में भी मड़ई मेलों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
संस्कारधानी में इन आयोजनों से न केवल स्थानीय व्यापारियों को रोज़गार मिलता है, बल्कि लोक परंपराओं को जीवित रखने में भी मदद मिलती है।







