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स्टेशन को पुनर्विकास का कार्य ठंडे बस्ते में पड़ा रानी कमलापति स्टेशन की तर्ज पर होना है कार्य

स्टेशन को पुनर्विकास का कार्य ठंडे बस्ते में पड़ा

रानी कमलापति स्टेशन की तर्ज पर होना है कार्य

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जबलपुर यशभारत। रेल यात्री सुविधाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर रेलवे स्टेशन को भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन की तर्ज पर विश्वस्तरीय बनाने की तैयारी कर रहा है। पूर्व में स्टेशन को विकसित करने के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये का बजट आया था लेकिन बाद में इस बजट पर ऐसी कैंची चली की यह आधा हो गया मतलब 500 करोड़ से घट कर 247 करोड़ पर आ गया और स्टेशन का कार्य अभी भी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। उल्लेखनीय है कि अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत जबलपुर रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने का सपना दिखा गया था।जिसका कार्य बजट आने के छः माह बाद भी यह कार्य अधर में लटका हुआ है। हालांकि इस संबंध में जो जानकारी मिली है उसके अनुसार इस स्टेशन को आधुनिक रूप देने के लिए डिजाइन तैयार हो रही है और यह कार्य पूर्ण होने के बाद इसकी टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जायेगी तब कहीं यह कार्य शुरू हो सकेगा। बता दें कि रानी कमलापति स्टेशन की तर्ज पर विकसित करने की योजना थी। किन्तु नगरवासियों का यह सपना कब पूर्ण होगा यह शुरू होने के बाद ही पता चल सकेगा।

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बढ़ेगी दो रेल लाईन

इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार नई योजना के तहत दो रेल लाईन और बढ़ाई जाएगी जिसके साथ प्लेटफार्म बढ़ने के साथ साथ सर्कुलेटिंग एरिया फोकस होगा। सभी विकास कार्य प्लेटफॉर्म-एक की ओर कराए जाएंगे। जानकारी के मुताबिक प्लेटफार्म एक की विल्डिंग को भी तोड़ा जायेगा। इसके साथ ही इटारसी और कटनी एंड पर दो फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) बनाए जायेंगे।

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यह आफिस टूटेंगे

प्लेटफार्म नंबर एक में यात्री बुकिंग विंडो ऑफिस, पार्सल कार्यालय, रिजर्वेशन सेंटर, प्रतीक्षालय, स्टोर, सोसायटी कार्यालय के पास का हिस्सा, पुराना फुट ओवर ब्रिज टूटेगा।
यह सुविधाएं बढ़ेगी
जानकारी के मुताबिक प्लेटफॉर्म एक के प्रवेश निकास द्वार के साथ सर्कुलेटिंग एरिया में सुधार होगा। एवं कटनी छोर पर 6 मीटर चौड़ा नया फुट ओवर ब्रिज इसके साथ ही नई लिफ्ट, एस्केलेटर, वेटिंग हॉल, रिटायरिंग रूम सहित अन्य निर्माण कार्य होंगे।

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दो अधिकारियों के बीच में फसा है पेंच

वहीं इस संबंध में यदि रेलवे सूत्रों की माने तो स्टेशन का विकास कार्य दो अधिकारियों के बीच में फसा हुआ है जो अपने अपने चहेतों को इसका टेंडर दिलवाने की जुगत में हैं। इस तरह से विभागों में सामंजस्य नहीं होने से  यह कार्य अधर में लटका हुआ है। जिससे पुनर्विकास कार्य में देरी हो रही। अब देखना यह होगा कि आखिर यह गेंद किसके पाले में जायेगी…?
क्या कहते हैं सीपीआरओ…
रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास को लेकर इसकी डिजाइन तैयार की जा रही है जैसे ही डिजाइन बन कर तैयार हो जायेगी उसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
हर्षित श्रीवास्तव
सीपीआरओ पमरे

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