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मवेशियों के मुंह का निवाला जलाकर धुआं बना रहा किसान

आखिर कब तक भड़केगी पराली की आग?

मवेशियों के मुंह का निवाला जलाकर धुआं बना रहा किसान,

आखिर कब तक भड़केगी पराली की आग?

जबलपुर यशभारत।प्रशासन की लाख समझाइश और सख्ती के बावजूद भी नपराली जलाने का सिलसिला नहीं रुक रहा है जिससे पर्यावरण और पशुधन दोनों पर संकट मंडरा रहा है।
उल्लेखनीय है कि फसल कटाई के बाद खेतों में बची पराली को जलाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों से सामने आया है, जहां किसान फसल काटकर घर तो ले आए, लेकिन मवेशियों के चारे के रूप में उपयोग होने वाली पराली को ही आग के हवाले कर दिया। यह न केवल पशुधन के लिए नुकसानदायक है, बल्कि पर्यावरण पर भी गंभीर असर डाल रहा है।
पराली जलाने से फैलता है धुआं
ग्रामीणों का कहना है कि पराली जलाने से निकलने वाला धुआं पूरे इलाके में फैल जाता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। वहीं दूसरी ओर, मवेशियों के लिए चारे की कमी भी गहराने लगी है। पशुपालक चिंतित हैं कि अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में पशुओं को खिलाने के लिए पर्याप्त चारा नहीं बचेगा।
आग लगाने से नहीं आ रहे बाज
उल्लेखनीय है कि प्रशासन द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और किसानों से अपील की जा रही है कि वे पराली को न जलाकर उसका वैकल्पिक उपयोग करें। इसके बावजूद कई किसान समय और लागत बचाने के लिए पराली में आग लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि पराली को जलाने के बजाय उसे खाद, पशु चारा या अन्य उपयोग में लाया जा सकता है, जिससे जमीन की उर्वरता भी बनी रहती है और पर्यावरण को नुकसान भी नहीं होता।अब सवाल यह है कि आखिर कब तक मवेशियों के मुंह का निवाला यूं ही जलता रहेगा और कब प्रशासन की सख्ती इस समस्या पर लगाम लगा पाएगी।

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