पहाड़ी पर गुजरी वो खौफनाक रात… और खाकी की केमिस्ट्री ने सुलझा दिया अंधे कत्ल का राज!

पहाड़ी पर गुजरी वो खौफनाक रात… और खाकी की केमिस्ट्री ने सुलझा दिया अंधे कत्ल का राज!
थाना प्रभारी शिल्पा कौरव की जुबानी, एक ऐसा केस जिसने पूरे रायसेन पुलिस को चौंका दिया था।
मेरा यादगार केस
भोपाल, यशभारत। मध्य प्रदेश पुलिस की एक ऐसी जांबाज अफसर, जो रसायन शास्त्र की बारीकियां सिखाते-सिखाते अपराधियों के बुरे रसायनों को ठिकाने लगाने निकल पड़ीं। साल 2012 बैच की सब-इंस्पेक्टर और वर्तमान में भोपाल के बजरिया थाने की कमान संभाल रहीं शिल्पा कौरव से अरविंद कुमार कपिल की विशेष बातचीत।
सवाल: मैडम, चौक-डस्टर छोड़कर हाथ में पिस्टल और कानून की किताब… यह बदलाव कैसे?
शिल्पा कौरव: देखिए, एम.एससी. के बाद लेक्चरर की नौकरी सुकून भरी थी, लेकिन दिल हमेशा एनसीसी के उन दिनों में अटका रहता था जब वर्दी पहनकर हम परेड करते थे। वो जज्बा और अनुशासन मेरी रगों में था। बस, उसी शौक और समाज के लिए कुछ सीधा करने की चाह ने मुझे पुलिस अकादमी पहुँचा दिया।
सवाल: आपके करियर का वो यादगार केस कौन सा है, जिसने रातों की नींद उड़ा दी थी?
शिल्पा कौरव: वो मामला रायसेन के नूरगंज का था। जंगल में एक अधजला नरकंकाल मिला था। चेहरा पत्थरों से कुचल दिया गया था ताकि पहचान न हो सके। वो पूरी तरह ब्लाइंड मर्डर था। मुझे आज भी याद है, सुराग की तलाश में मैं पूरी रात उस वीरान पहाड़ी पर बैठी रही। सिर्फ एक धुंधली उम्मीद थी कि अपराधी ने कहीं तो गलती की होगी।
सवाल: उस केस में कातिल तक पहुँचने वाली वो जादुई कड़ी क्या थी?
शिल्पा कौरव: वो जादू नहीं, बारीक नजर थी। जब फॉरेंसिक डॉग्स हमें पास के गाँव ले गए, तो मुझे कंकाल के लंबे बाल और शर्ट की जली हुई कॉलर ने चौंकाया। 5 जनवरी को गायब हुए एक युवक का हुलिया इससे मेल खा रहा था। कड़ाई से की गई पूछताछ में पता चला कि गुड्डू मियां ने अपनी पत्नी पर शक के चलते, घर में टीवी की आवाज तेज कर बड़ी बेरहमी से कत्ल किया था। उन 13 दिनों की मेहनत ने 4 कातिलों को उम्रकैद की सलाखों के पीछे पहुँचाया।
सवाल: लोग अक्सर पुलिस के खौफ से डरते हैं, आपका नजरिया क्या है?
शिल्पा कौरव: मेरा मानना बहुत साफ है हर व्यक्ति अपराधी नहीं होता। पुलिस को अपना पुराना रफ-टफ रवैया बदलना होगा। जब तक हम जनता के साथ नर्म और मानवीय व्यवहार नहीं करेंगे, तब तक आम आदमी पुलिस को अपना मददगार नहीं समझेगा। पुलिस और जनता के बीच का डर खत्म होना जरूरी है।
सवाल: खाकी पहनने का सपना देखने वाले युवाओं से क्या कहेंगी?
शिल्पा कौरव: सिर्फ नौकरी पाने के लिए मत आइए, एक जज्बा लेकर आइए। पुलिसिंग अनुशासन और सेवा का संगम है। समाज सेवा आप कहीं भी रहकर कर सकते हैं, लेकिन यहाँ रहकर आप किसी की जिंदगी में सीधे बदलाव ला सकते हैं। बस, हिम्मत रखिए और ईमानदारी से जुड़िए।







