साइबर फ्रॉड की ई-एफआईआर पर साइन अनिवार्य: 30 दिन में नहीं पहुंचे थाने, तो निरस्त होगी रिपोर्ट

साइबर फ्रॉड की ई-एफआईआर पर साइन अनिवार्य: 30 दिन में नहीं पहुंचे थाने, तो निरस्त होगी रिपोर्ट
भोपाल, यशभारत। मध्य प्रदेश में साइबर अपराधियों पर नकेल कसने और जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने एफआईआर के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब 1 लाख रुपये या उससे अधिक की साइबर धोखाधड़ी के मामलों में ई-एफआईआर दर्ज होने के बाद शिकायतकर्ता को संबंधित थाने जाकर हस्ताक्षर करना अनिवार्य होगा। यदि शिकायतकर्ता 30 दिनों के भीतर हस्ताक्षर नहीं करता है, तो दर्ज की गई ई-एफआईआर स्वतः निरस्त मान ली जाएगी।
डीजीपी कैलाश मकवाणा ने इस संबंध में सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों और संबंधित इकाइयों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
जांच तुरंत शुरू होगी, पर साइन जरूरी
नए नियमों के अनुसार, जैसे ही कोई पीड़ित ‘नेशनल साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल’ या हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से शिकायत दर्ज कराएगा, पुलिस की शुरुआती जांच तुरंत शुरू हो जाएगी। इसमें बैंक खातों को फ्रीज करना, सीसीटीवी फुटेज जुटाना और सीडीआर निकालना जैसे काम शामिल होंगे, जिनके लिए शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर का इंतजार नहीं किया जाएगा। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए पीड़ित का थाने पहुंचना जरूरी होगा।
3 दिन में आएगा बुलावा
प्रक्रिया के तहत, साइबर पुलिस मुख्यालय शुरुआती परीक्षण के बाद शिकायत को संबंधित जिले के थाने में ट्रांसफर करेगा। शिकायत ट्रांसफर होने के 3 दिनों के भीतर पुलिस पीड़ित को हस्ताक्षर के लिए थाने बुलाएगी।
इन प्रमुख बदलावों को जानें:
पहले राज्य साइबर पुलिस केवल 2 लाख रुपये से अधिक के मामलों की जांच करती थी, अब 1 लाख रुपये से अधिक के सभी मामले इसके दायरे में आएंगे। शिकायतकर्ता के न पहुंचने पर 30 दिन बाद ई-एफआईआर सिस्टम से हट जाएगी। हस्ताक्षर से पहले ही खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी ताकि पीड़ित की राशि बचाई जा सके।
पुलिस विभाग का मानना है कि इस कदम से फर्जी शिकायतों पर रोक लगेगी और गंभीर मामलों में पुलिस को कानूनी रूप से मजबूत साक्ष्य प्राप्त हो सकेंगे।







