बाणगंगा क्षेत्र में नाले की गंदगी बनी गंभीर समस्या

बाणगंगा क्षेत्र में नाले की गंदगी बनी गंभीर समस्या
– दूषित जल से जनस्वास्थ्य पर मंडराया खतरा
भोपाल, यशभारत। राजधानी भोपाल के बाणगंगा इलाके में फैली भारी गंदगी और नाले का गंदा पानी स्थानीय लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। क्षेत्र में खुले नाले से लगातार दूषित पानी बह रहा है, जिससे आसपास का वातावरण दुर्गंधयुक्त हो गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि इसी नाले के ऊपर से कोलार जलप्रदाय योजना की मुख्य पाइपलाइन गुजर रही है, जो शहर के बड़े हिस्से में पीने के पानी की आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। इससे जल के दूषित होने की आशंका लगातार बनी हुई है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि नाले में घरेलू कचरा, प्लास्टिक, सड़ा-गला अपशिष्ट और गंदा पानी जमा रहता है। बारिश के दिनों में यह गंदगी और अधिक फैल जाती है, जिससे नाले का पानी सडक़ों और गलियों में भर जाता है। इससे पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। बदबू के कारण लोगों का घरों में रहना दूभर हो गया है, वहीं मच्छरों और मक्खियों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। दूषित जल और गंदगी के चलते क्षेत्र में स्वास्थ्य समस्याएं भी बढऩे लगी हैं। बच्चों और बुजुर्गों में पेट दर्द, उल्टी-दस्त, त्वचा रोग और बुखार जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय चिकित्सकों के अनुसार, यदि नाले की सफाई और जल संरक्षण पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो जलजनित बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है।
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि नाले के ऊपर से गुजर रही कोलार की मुख्य पाइपलाइन से पूरे शहर को पीने का पानी सप्लाई किया जाता है। लोगों का कहना है कि यदि पाइपलाइन में कहीं भी लीकेज हुआ या गंदा पानी पाइप के संपर्क में आया तो पीने का पानी दूषित हो सकता है, जिससे बड़े स्तर पर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने कई बार नगर निगम और संबंधित विभागों को शिकायतें दी हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। सफाई कभी-कभार होती है, लेकिन कुछ ही दिनों में हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं। नाले को ढकने, नियमित सफाई और पाइपलाइन की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही नाले की समुचित सफाई नहीं की गई और जलप्रदाय व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हुई, तो इसका खामियाजा पूरे शहर को भुगतना पड़ सकता है। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि बाणगंगा क्षेत्र की इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देकर नाले की सफाई, कचरा हटाने और पाइपलाइन की नियमित जांच की जाए, ताकि लोगों को स्वच्छ वातावरण और सुरक्षित पेयजल मिल सके।
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9801 अमृत मित्र तैनात, 90 हजार से अधिक लिए नमूने
शासन स्तर पर दावा किया जा रहा है कि प्रदेश के नागरिकों को स्वच्छ, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। 10 जनवरी से प्रदेशभर में स्वच्छ जल अभियान की शुरुआत की गई है, जिसका शुभारंभ माननीय मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश द्वारा किया गया। यह अभियान जल प्रदूषण की रोकथाम, जल आपूर्ति व्यवस्था में पारदर्शिता और जनविश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। स्वच्छ जल अभियान के तहत शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जल गुणवत्ता की सघन जांच की जा रही है। जल आपूर्ति के डिस्चार्ज प्वाइंट्स से लेकर घरों के नलों तक से पानी के नमूने एकत्र कर परीक्षण किया जा रहा है। अब तक कुल 90453 जल नमूनों की जांच की जा चुकी है, जिनमें से केवल 973 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। यह आंकड़ा दर्शाता है कि राज्य सरकार द्वारा जल गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित किया गया है। अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में 9801 अमृत मित्र महिलाएं घर-घर जाकर जल नमूने एकत्र कर रही हैं।







