फूल छाप कांग्रेसियों की भी हो रही गुप्त रिपोर्ट तैयार, कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान ने कईयों की नींद उड़ायी

जबलपुर यंश भारत। प्रदेश की राजधानी भोपाल से राहुल गांधी के द्वारा शुरू किए गए संगठन सृजन अभियान की हलचल इस समय तेज है। केंद्र के द्वारा पर्यवेक्षक बनाए गए नेता और पदाधिकारी एक-एक जिले में जाकर अभियान को लेकर कार्यकर्ताऔ जनप्रतिनिधि और पार्टी पदाधिकारी से अलग-अलग वन टू वन चर्चा करने की कवायद में लगे हैं। यदि जबलपुर की ही बात की जाए तो यहां के ग्रामीण के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए नियुक्त किए गए हरिद्वार के विधायक रवि बहादुर सिंह पिछले कई दिनों से जिले के प्रवास पर हैं जहां वे न केवल विधानसभावार बैठेकेले रहे है वही वन टू वन कार्यकर्ताओं जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ नेताओं से संवाद भी कर रहे हैं। अभी तक उनके द्वारा पनागर पाटन की बैठक.ली जा चुकी है जबकि आज सिहोरा मैं बैठक प्रस्तावित है। बरगी विधानसभा की बैठक भी हो सकती थी लेकिन जिस दिन बैठक होना थी उसी दिन बरगी ब्लॉक अध्यक्ष के निधन के कारण बैठक को स्थगित कर दिया गया था। संभवतः यह बैठक अगले एक-दो दिनों में आयोजित होगी। इसके अलावा वे रोजाना सर्किट हाउस में लोगों के मिल भी रहे हैं। इधर दूसरी तरफ से शहर के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए गुरदीप सिंह सप्पल के भी कल 18 जून को आने की संभावना है और इसको लेकर कांग्रेस के द्वारा तैयारी भी शुरू कर दी गई है। कल भी पूर्व और मध्य विधानसभा के नेताओं और कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित कर सकते हैं। उनके साथ प्रदेश कांग्रेस द्वारा पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए अजय सिंह राहुल और हरदा के विधायक आर दोगनेभी मौजूद रहेंगे।
गुप्त रिपोर्ट भी हो रही तैयार
एक तरफ जहां संगठन सृजन अभियान को लेकर यह प्रक्रिया चल रही है तो दूसरी तरफ सूत्रों से जो जानकारी मिली है उसके अनुसार ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं की गुप्त तरीके से रिपोर्ट भी तैयार की जा रही है जो है तो कांग्रेस पार्टी में लेकिन उनका झुकाव भाजपा की तरफ रहता है। यानी कि दिन में कांग्रेसी और रात में भाजपाई या फिर यूं कहें कि फूल छाप कांग्रेसी इस संगामित्ती पर भी पर्यवेक्षकों की नजर है और वे अपने तरीके से फीडबैक लेकर न केवल रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं बल्कि इस रिपोर्ट को रोजाना दिल्ली भी भेजा जा रहा है। इस खबर से कई कांग्रेस नेताओं में खलबली है और उनकी नींद उड़ी हुई है। कारण यह है कि जिस तरह से राहुल गांधी इस अभियान को लेकर गंभीर नजर आए हैं उससे लोगों में खलबली मचना स्वाभाविक है।







