
मुंबई, यश भारत।
महाराष्ट्र के मंत्रालय में सामने आए कथित रिश्वत प्रकरण को लेकर सियासत तेज हो गई है। राज्य के खाद्य एवं औषध प्रशासन (एफडीआई) मंत्री नरहरी झिरवाल ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जबकि विपक्ष ने जांच पूरी होने तक उनके इस्तीफे की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, 12 फरवरी को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने मंत्रालय परिसर में एफडीआई विभाग के लिपिक राजेंद्र धेरंगे को कथित तौर पर 35,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। यह कार्रवाई दक्षिण मुंबई स्थित राज्य सचिवालय मंत्रालय में की गई थी। मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया है।
प्रकरण से जुड़े स्टिंग ऑपरेशन के बाद मंत्री के निजी सचिव डॉ. रामदास गाडे को भी उनके पद से हटाकर मूल विभाग में वापस भेज दिया गया है। विधानसभा परिषद में कांग्रेस नेता सतेज पाटिल ने आरोप लगाया कि एसीबी ने छापे से पहले दो दिनों तक मंत्री कार्यालय की रेकी की थी और जांच पूरी होने तक मंत्री को पद पर नहीं रहना चाहिए।
इन आरोपों पर जवाब देते हुए झिरवाल ने कहा कि गिरफ्तारी के समय वह दिल्ली में थे और उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि वे किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं करते और भविष्य में भी नहीं करेंगे।
हालांकि, विपक्ष उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और सदन में विरोध प्रदर्शन करते हुए वॉकआउट किया।






