स्टाफ के संकट से हांफती आरपीएफ व जीआरपी, ट्रेनों में घटती पेट्रोलिंग से बढ़ा अपराध का खतरा, ट्रेन व यात्रियों में हुआ इजाफा.लेकिन सुरक्षा व्यवस्था कम

जबलपुर यशभारत। रेलवे को देश की लाइफ लाइन कहा जाता है लेकिन इसी लाइफ लाइन की सुरक्षा व्यवस्था इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है। यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली आरपीएफ व जीआरपी भारी स्टाफ की कमी से जूझ रही हैं। हालात यह हैं कि अनेक मेल-एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों में नियमित पेट्रोलिंग नहीं हो पा रही है जिससे रेल यात्रा अब पहले जैसी सुरक्षित नहीं रह गई है।
सेवानिवृत हो रही है लेकिन भर्ती नहीं
इस संबंध विभागीय जानकारी के मुताबिक दोनों टीमों में अधिकारी व कर्मचारी लगातार सेवानिवृत्त हो रहे बावजूद नई भर्तियों की प्रक्रिया ठप होने से सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा असर दिखाई देने लगा है।
स्वीकृत पदों की तुलना में आधा बल ही तैनात
सूत्रों के मुताबिक आरपीएफ और जीआरपी के कई थानों व चौकियों में स्वीकृत पदों की तुलना में आधे से भी कम कर्मचारी तैनात हैं। सीमित स्टाफ के कारण एक-एक जवान को कई ट्रेनों और स्टेशनों की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। ऐसे में न तो प्रभावी निगरानी हो पा रही है और न ही समय पर कार्रवाई संभव हो रही है। कई लंबी दूरी की ट्रेनों में तो सुरक्षा कर्मियों की अनुपस्थिति आम बात हो गई है जिसका फायदा असामाजिक तत्व उठा रहे हैं।
स्टाफ की कमी का सीधा असर अपराधों की रोकथाम पर पड़ रहा है। ट्रेनों और प्लेटफार्मों पर चोरी, मोबाइल झपटमारी, महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और यात्रियों से मारपीट जैसी घटनाओं में इजाफा हो रहा है।
अपराधियों में कम हो रहा कानून का डर
नियमित पेट्रोलिंग नहीं होने से अपराधियों में कानून का डर कम होता जा रहा है। कई मामलों में पीड़ितों को शिकायत दर्ज कराने और मदद मिलने में भी देरी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारों का कहना है कि बीते वर्षों में बड़ी संख्या में आरपीएफ और जीआरपी कर्मी सेवानिवृत्त हुए हैं, लेकिन उनके स्थान पर नई भर्ती नहीं की गई। वहीं बढ़ती आबादी और यात्रियों की संख्या के अनुपात में सुरक्षा बलों की संख्या लगातार घटती जा रही है। मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव होने से मानसिक और शारीरिक थकान भी बढ़ रही है, जो ड्यूटी की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है।
सुरक्षा व्यवस्था हो रही कमजोर
विभागीय सूत्रों के मुताबिक जल्द से जल्द इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो रेलवे में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कमजोर हो सकती है, जिसका खामियाजा सीधे आम यात्रियों को भुगतना पड़ेगा।
ट्रेनें व यात्रियों में हुआ इजाफा लेकिन सुरक्षा व्यवस्था न के बराबर
जानकारी के मुताबिक जीआरपी में एक सैकड़ा बल से अधिक होना चाहिए लेकिन आधा बल ही तैनात रहने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है वहीं आरपीएफ भी लंबे समय से स्टाफ की कमी से जूझ रही है ऐसी स्थितियों में किस तरह से यात्रियों व ट्रेनों की सुरक्षा हो सकेगी यह बड़ा सवाल है।







