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वाद विवाद स्पर्धा में अच्छे से पक्ष रखना एक कला है:विवेक तन्खा

मूट कोर्ट में छात्र की प्रस्तुति को मुख्यमंत्री ने सराहा, दूसरे लोगो ने ट्रोल किए जाने पर चिंता जताई

यशभारत। गत दिवस इंदौर में विधि छात्रों द्वारा प्रस्तुत मूट कोर्ट के दौरान एक छात्र संघमित्र की प्रस्तुति को ट्रोल किये जाने पर वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने संघमित्र की वाक पटुता की न केवल सराहना की बल्कि कुछ सुझाव भी दिए। विवेक तन्खा का यह कदम न केवल प्रोत्साहन है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि ऐसी प्रतिभा को राजनीति के तराजू में नहीं तोला जाना चाहिए। 

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उन्होंने कहा कि संघमित्र एक टैलेंटेड स्टूडेंट है। बात – विवाद प्रतियोगिता में पक्ष अ’छे से रखना प्रशंसनीय कला है। लॉ कॉलेज में मूट कोर्ट्स में छात्र एवं छात्राएँ पक्ष एवं विपक्ष भिन्न विषयों में बख़ूबी से रखते हैं। वे प्रशंसा के पात्र होते है, ट्रोल का नहीं। उन्होंने कहा कि बच्चों का मनोबल बढ़ाइये, गिराइए मत। वाद-विवाद प्रतियोगिता का मूल ही यही है कि कुछ प्रतिभागी पक्ष रखते हैं तो कुछ विपक्ष। संघमित्र ने वहां विपक्ष की भूमिका निभाते हुए अपनी वाक्-कला का परिचय दिया। यह ठीक वैसा ही है जैसे रंगमंच पर कोई अभिनेता कभी नायक तो कभी खलनायक का अभिनय करता है। जैसे मेरे प्रिय मित्र आशुतोष राणा इंदौर में गत दिवस आयोजित होने वाले “हमारे राम” नाटक में रावण की भूमिका निभाई है। क्या इससे वे सचमुच रावण हो गए? नहीं, यह तो केवल कला की अभिव्यक्ति है।

दु:ख की बात यह है कि संघमित्र को केवल इस वजह से ट्रोल किया जा रहा है। क्योंकि वे इंदौर के मेयर पुष्यमित्र के पुत्र हैं। यह आलोचना एक उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर युवा की प्रतिभा और आत्मविश्वास को तोडऩे का प्रयास है। यह व्यवहार न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि हमारे समाज की सोच पर भी गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। कितना खेदजनक है कि राजनीति इतनी नीचे गिर जाए कि बच्चों की मासूम प्रतिभा भी उसकी भेंट चढ़ जाए। मध्यप्रदेश की राजनीति का इस स्तर तक गिरना वास्तव में चिंताजनक है।

मैं हृदय से मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव का आभारी हूँ, जिन्होंने संघमित्र की वाकपटुता को न सिर्फ सराहा बल्कि कुछ सुझाव भी दिए।उनका यह कदम न केवल प्रोत्साहन है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि सच्ची प्रतिभा को राजनीति के तराजू में नहीं तोला जाना चाहिए। लॉ कॉलेज में मूट कोर्ट्स में छात्र एवं छात्राएँ पक्ष एवं विपक्ष भिन्न विषयों में बख़ूबी से रखते हैं। वे प्रशंसा के पात्र होते है, ट्रोल का नहीं। ब’चों का मनोबल बढ़ाइये, गिराइए मत।

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