नए सत्र में निजी स्कूलों की मनमानी से बढ़ा खर्च, अभिभावकों ने उठाई सख्ती की मांग

नए सत्र में निजी स्कूलों की मनमानी से बढ़ा खर्च, अभिभावकों ने उठाई सख्ती की मांग
भोपाल यश भारत। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही राजधानी भोपाल में निजी स्कूलों की फीस और किताबों को लेकर अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एडमिशन के दौरान तीन महीने की अग्रिम फीस, महंगी किताब , कॉपियां और अलग अलग मदों में शुल्क वसूली से अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। माध्यमिक शिक्षा मंडल और जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए निजी स्कूल अभिभावकों को निर्धारित पब्लिकेशन की किताबें खरीदने के लिए बाध्य करते हैं। ये किताबें केवल चुनिंदा दुकानों या स्कूल परिसर में ही उपलब्ध कराई जाती हैं जिससे कीमतें बढ़ जाती हैं और कमीशन खोरी की संभावना भी बनी रहती है। अभिभावकों ने बताया कि हर साल फीस, पंजीकरण और पाठ्यक्रम की लागत में वृद्धि हो रही है, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना कठिन होता जा रहा है। बढ़ती महंगाई के बीच शिक्षा अब एक बड़ी आर्थिक चुनौती बनती जा रही है। मंच ने मांग की है कि अभिभावकों को खुले बाजार से किताबें खरीदने की स्वतंत्रता होनी चाहिए और निजी प्रकाशनों की कीमतों पर नियंत्रण लगाया जाए। साथ ही, स्कूलों द्वारा यूनिफॉर्म के लिए तय दुकानों की अनिवार्यता को भी समाप्त किया जाना चाहिए इसके अलावा, एक ही विषय के लिए कई कई किताबें लागू किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। इससे न केवल अभिभावकों का खर्च बढ़ता है बल्कि बच्चों के स्कूल बैग का वजन भी अधिक हो जाता है जो उनके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है।
अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि शिक्षा से जुड़े खर्चों को नियंत्रित करने के लिए ठोस नीति बनाई जाए सरकारी पुस्तकों को बढ़ावा दिया जाए और स्कूल बैग के वजन को लेकर स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए जाएं ताकि अभिभावकों को राहत मिले







