पर्यावरण की आड़ में शासकीय भूमि पर पक्का अतिक्रमण, !
मनमानी करते हुए लोग घर के बाहर की सरकारी जगह पर बगीचे, पौधे और पक्के निर्माण कर लेते हैं।

पर्यावरण की आड़ में शासकीय भूमि पर पक्का अतिक्रमण
जबलपुर। शहर में अतिक्रमण का यह नया और गंभीर रूप तेजी से पैर पसार रहा है, जहां पर्यावरण संरक्षण और बगीचे विकसित करने के नाम पर शासकीय भूमि पर खुलेआम कब्ज़े किए जा रहे हैं। नगर निगम से सीमा तक नक्शा पास कराकर लोग घर तो नियमों के अनुसार बना लेते हैं, लेकिन इसके आगे वे मनमानी करते हुए लोग घर के बाहर की सरकारी जगह पर बगीचे, पौधे और पक्के निर्माण कर लेते हैं।

कई स्थानों पर लोग इस तथाकथित “बगीचे” के आगे अपनी गाड़ियां भी खड़ी करने लगे हैं, जो स्पष्ट रूप से शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का रूप है। हैरानी की बात तो यह है कि कुछ शासकीय अधिकारी—जो विभिन्न विभागों में उच्च पदों पर पदस्थ हैं—भी इसी प्रवृत्ति में शामिल पाए गए हैं। बताया जाता है कि ऐसे ही एक अधिकारी (विद्युत विभाग के अधीक्षक यंत्री/कार्यपालन यांत्रिक) ने अपने घर के बाहर शासकीय भूमि पर पक्का निर्माण कर लिया है, और उनकी ब्लैक स्कॉर्पियो (नंबर 3602) इसी कब्जाई गई जगह से सटकर मुख्य सड़क तक खड़ी होती है।

शहरवासियों का कहना है कि सुस्त नगर निगम व्यवस्था और गैर-जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी ही लोगों को ऐसे अतिक्रमण के लिए प्रोत्साहित करती है। स्थिति यह है कि हाल ही में हुई सड़क निर्माण प्रक्रिया के दौरान भी इन अतिक्रमणों को हटाया नहीं गया। निगम ने उपलब्ध जगह तक ही सड़क बनाई, पर कब्जे हटाने में कोई रुचि नहीं दिखाई, जो कई बड़े सवाल खड़े करता है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ऐसे साहसी अतिक्रमण सिर्फ इसलिए फल-फूल रहे हैं क्योंकि कहीं न कहीं नगर निगम के कुछ कर्मचारियों की मौन सहमति या मिलीभगत भी शामिल है। इसी कारण “हमारा कौन क्या बिगाड़ लेगा” जैसी मानसिकता बढ़ती जा रही है और अधिकारी आँखें बंद किए बैठे हैं।

शहर में लगातार फैल रहे इस प्रकार के पक्के अतिक्रमणों से न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है, बल्कि सरकारी भूमि के संरक्षण और शहरी व्यवस्था दोनों पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।







