
अंतर-जिला धान भेजने में ओवरलोडिंग पर खुली छूट
जबलपुर, यश भारत। धान मिलिंग और उसके परिवहन को लेकर शासन और प्रशासन की दोहरी नीति सामने आ रही है। जबलपुर जिले में ओवरलोडिंग के मामलों में प्रशासन ने कई राइस मिलों के खिलाफकार्रवाई की है और कुछ मिलों की जांच भी शुरू की है। लेकिन इसके बावजूद अंतर-जिला धान भेजने वाले ट्रकों में क्षमता से अधिक धान लोड करने पर अधिकारियों ने पूरी तरह छूट दे रखी है, जो सीधे नियमों के खिलाफहै।
मंगलवार को जबलपुर से इंदौर रैक के माध्यम से धान भेजी जा रही है जिसकी लोडिंग ट्रकों से हो रही है उस मे भी ओवरलोडिंग की गई है। गेट पास और कांटा पर्ची की पूरी जानकारी प्रशासन के पास भी है, फिर भी किसी प्रकार
की रोकथाम नहीं की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की छूट व्यापारियों और उद्योग जगत के लिए खतरा बन रही है। अधिकारी यह मान रहे हैं कि नियम केवल जिले के
मिलों पर लागू होते हैं, जबकि दूसरे जिलों को धान भेजने में पूरी छूट दी जा रही है। इससे जबलपुर के व्यवसाय और सरकारी परिवहन व्यय पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। दोहरी नीति से प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लग रहा है, क्योंकि कुछ मिलों की जांच लंबित रह गई है जबकि बड़े पैमाने पर धान का परिवहन नियमों की अनदेखी कर किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शासन और प्रशासन नियमों को समान रूप से लागू करे और ओवरलोडिंग पर किसी प्रकार की छूट न दे, तो व्यापारियों का हित सुरक्षित रहेगा और जिले का व्यवसाय भी प्रभावित नहीं होगा। वर्तमान स्थिति में नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं और आर्थिक नुकसान की संभावना बढ़ रही है।







