पशुपालन विभाग की जमीन पर कब्जा करने वाले लोगों को जारी होंगे नोटिस – सरकारी जगह पर बन गई कॉलोनियां, दुकानें

पशुपालन विभाग की जमीन पर कब्जा करने वाले लोगों को जारी होंगे नोटिस
– सरकारी जगह पर बन गई कॉलोनियां, दुकानें
भोपाल यशभारत। राजधानी के कोकता अनंतपुरा क्षेत्र में पशुपालन विभाग की जमीन पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण का खुलासा हुआ है। प्रशासन द्वारा कराए गए सीमांकन में कई सरकारी और निजी निर्माण सामने आए हैं। इसमें नगर निगम की 50 दुकानें, एक पेट्रोल पंप, एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट), कॉलोनियों के गेट, सडक़ें और पार्क तक शामिल हैं। यह मामला अब गंभीर विवाद का रूप ले चुका है।
गोविंदपुरा तहसीलदार सौरभ वर्मा अब कब्जा करने वालों को नोटिस जारी करेंगे। आज से नोटिस जारी किए जा रहे हैं। यह नोटिस उन सभी व्यक्तियों, संस्थाओं और कॉलोनियों को दिया जाएगा, जिन पर जमीन कब्जाने का आरोप है। प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण हटाने और जमीन को वापस लेने के लिए सभी कानूनी उपाय अपनाए जाएंगे।
डायमंड सिटी कॉलोनी में सबसे ज्यादा कब्जे
सीमांकन रिपोर्ट ने साफ किया है कि सबसे ज्यादा अतिक्रमण डायमंड सिटी कॉलोनी में पाया गया। यहां 20 पक्के मकान बनाए जा चुके हैं। इसके साथ ही एक निजी स्कूल, शादी हॉल/रिसोर्ट, फार्म हाउस और 1 एकड़ पर खेतीबाड़ी की जा रही है। इतना ही नहीं, लगभग 130 डेसीमल भूमि पर अवैध खेती भी चल रही है। रिपोर्ट में दर्ज है कि यह सभी निर्माण कार्य पशुपालन विभाग की भूमि पर हुए हैं।
लोगों ने लगाई है प्रशासन से मदद की गुहार
कॉलोनीवासियों ने इस कार्रवाई के खिलाफ मदद की गुहार लगाई है। इस संबंध में लोगों ने गोविंदपुरा एसडीएम के ज्ञापन भी दिया है। एसडीएम ने आश्वासन दिया है कि पहले सभी के दस्तावेज जांचे जाएंगे उसके बाद ही कार्रवाई की जाएगी। लोगों का कहना है कि वर्षों से यहां रह रहे हैं और कई परिवारों ने अपनी जीवन भर की पूंजी लगाकर मकान बनाए हैं। यदि प्रशासन अचानक कार्रवाई करता है तो उन्हें भारी नुकसान होगा। निवासियों का आग्रह है कि सरकार और विभाग मिलकर इस विवाद का समाधान निकालें और वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करें।
पशुपालन विभाग की जमीन पर मछली परिवार और करीबियों का कब्जा
पशुपालन विभाग की जमीन पर मछली परिवार और उनके करीबियों के कब्जे का मामल भी सामने आया है। प्रशासन द्वारा कराए गए सीमांकन में पाया गया कि परिवार और उनके रिश्तेदारों ने विभागीय जमीन पर मकान, खेती और अन्य निर्माण कार्य कर लिए हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि मछली परिवार ने न केवल खेती योग्य भूमि का उपयोग किया, बल्कि पक्के मकान खड़े कर लिए। उनके करीबियों के नाम से भी कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जे दर्ज हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, यह जमीन मूल रूप से पशुपालन विभाग के उपयोग के लिए आरक्षित थी, लेकिन धीरे-धीरे निजी कब्जे बढ़ते चले गए।







