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मुंबई लोकल ट्रेन धमाके: जांच से जुड़े 3 पूर्व IPS अधिकारियों की सुरक्षा पर विचार

 

मुंबई, 11 जुलाई 2006 के मुंबई लोकल ट्रेन धमाकों की संवेदनशील जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तीन पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की सुरक्षा पर महाराष्ट्र पुलिस गंभीरता से विचार कर रही है। यह निर्णय मुंबई बम धमाकों से संबंधित एक मामले में हाल ही में एक गिरफ्तार आरोपी के बॉम्बे हाईकोर्ट से बरी होने के बाद लिया गया है।

जिन पूर्व अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर मंथन चल रहा है, उनमें एएन रॉय, केपी रघुवंशी और जैजीत सिंह शामिल हैं। 2006 के उस भयावह समय में, एएन रॉय मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद पर कार्यरत थे, जबकि केपी रघुवंशी एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) के प्रमुख के तौर पर धमाकों की जांच का नेतृत्व कर रहे थे। जैजीत सिंह तब अपनी टीम में DIG रैंक के अधिकारी थे और उन्होंने जांच प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई थी।

संभावित खतरों के मद्देनजर फैसला:

पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह कदम इन पूर्व अधिकारियों को संभावित प्रतिक्रिया या खतरे की आशंका के मद्देनजर उठाया जा रहा है। मुंबई बम धमाकों जैसे हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील मामलों में जांच से जुड़े अधिकारियों को अक्सर खतरों का सामना करना पड़ता है, खासकर जब आरोपी बरी हो जाते हैं।

हाल ही में हुई एक आंतरिक बैठक के दौरान, महाराष्ट्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पुलिस महानिदेशक (DGP) रश्मि शुक्ला के समक्ष इन पूर्व अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का सुझाव रखा। इस सुझाव के बाद, अब औपचारिक रूप से उनकी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।

मामले की संवेदनशीलता और पूर्व अधिकारियों की भूमिका:

11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में सिलसिलेवार बम धमाकों ने देश को हिलाकर रख दिया था। इन धमाकों में सैकड़ों लोग मारे गए थे और घायल हुए थे। एएन रॉय के नेतृत्व में मुंबई पुलिस और केपी रघुवंशी के नेतृत्व में एटीएस ने इस जटिल मामले की जांच की थी, जिसमें कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। जैजीत सिंह जैसे अधिकारियों ने जांच टीम के सदस्य के रूप में सबूत इकट्ठा करने और दोषियों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

अब जब इस मामले से जुड़े एक आरोपी को हाईकोर्ट से बरी कर दिया गया है, तो उन अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं जिन्होंने शुरुआती जांच में अहम भूमिका निभाई थी। महाराष्ट्र पुलिस का यह कदम उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें किसी भी संभावित खतरे से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि इन पूर्व अधिकारियों को किस प्रकार की सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी।

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