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राज्यसभा में पक्षी संरक्षण पर ,सांसद तन्खा ने उठाया सवाल 

संरक्षण के लिए उठाए गए कदम

राज्यसभा में पक्षी संरक्षण पर ,सांसद तन्खा ने उठाया सवाल 

नई दिल्ली, यश भारत।  राज्यसभा सांसद विवेक तंखा ने संसद के मानसून सत्र में देश में पक्षियों की प्रजातियों के संरक्षण और सुरक्षा को लेकर सवाल उठाया। इस प्रश्न के जवाब में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।  जवाब के अनुसार, भारत में अब तक 1,300 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं, जिनमें से लगभग 100 से अधिक प्रजातियाँ संकटग्रस्त  श्रेणी में आती हैं। इनकी सुरक्षा हेतु केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मिलकर विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही हैं।

संरक्षण के लिए उठाए गए कदम
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत पक्षियों की कई प्रजातियों को अनुसूचियों में शामिल कर कानूनी सुरक्षा दी गई है। देशभर में 100 से अधिक राष्ट्रीय उद्यान और 500 से अधिक वन्यजीव अभयारण्य स्थापित किए गए हैं, जहाँ दुर्लभ पक्षी प्रजातियों के संरक्षण की व्यवस्था है। 11 बायोस्फीयर रिजर्व और कई इको-सेंसिटिव जोन को अधिसूचित किया गया है, ताकि प्राकृतिक आवास सुरक्षित रह सकें। वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) संरक्षण कार्यक्रम और सेंट्रल ज़ू अथॉरिटी की पहल भी पक्षियों की प्रजातियों को संरक्षित करने में सहायक है। भारतीय वन्यजीव संस्थान और अन्य शोध संस्थाएँ नियमित रूप से पक्षियों की जनसंख्या और आवास का अध्ययन कर रही हैं। सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि शहरीकरण, प्रदूषण, शिकार और जलवायु परिवर्तन पक्षी प्रजातियों के अस्तित्व पर गंभीर खतरे हैं। इसके समाधान हेतु केंद्र और राज्य सरकारें संयुक्त रूप से जागरूकता अभियान, आवास संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा दे रही हैं।सांसद विवेक तंखा के सवाल से यह स्पष्ट हुआ कि जैव विविधता और पक्षियों का संरक्षण अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर विमर्श का विषय बन चुका है। यह पहल न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य की पीढिय़ों के लिए प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में भी सहायक होगी।

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