MP मोहन डेलकर आत्महत्या केस: नौ लोगों के खिलाफ FIR रद्द करने का हाईकोर्ट का आदेश बरकरार; शीर्ष कोर्ट का फैसला
2021 में मुंबई के एक होटल में मृत पाए गए थे

MP मोहन डेलकर आत्महत्या केस: नौ लोगों के खिलाफ FIR रद्द करने का हाईकोर्ट का आदेश बरकरार; शीर्ष कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने मोहन डेलकर आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में नौ लोगों के खिलाफ एससी-एसटी (अत्याचार निवारण अधिनियम) और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। पूर्व सांसद के बेटे की ओर से दायर याचिका को मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी, जिसमें पूर्व लोकसभा सांसद मोहन डेलकर को 2021 में कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में नौ लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया गया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 सितंबर, 2022 को मामले में नौ लोगों के खिलाफ मामला रद्द कर दिया था, जिनमें दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल भी शामिल थे।
2021 में मुंबई के एक होटल में मृत पाए गए थे
दादरा और नगर हवेली से सात बार सांसद रहे देलकर की मृत्यु के बाद एफआईआर दर्ज की गई थी, जो 2021 में मुंबई के एक होटल में मृत पाए गए थे। उनके कथित सुसाइड नोट में उत्पीड़न और धमकी का विस्तृत विवरण था, जिसके बाद शीर्ष नौकरशाहों और राजनीतिक हस्तियों सहित कई लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई थी।
शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने दिवंगत सांसद के बेटे अभिनव देलकर की याचिका पर 4 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।







