“माँ… हम आ गए!” रोती-बिखलती माँ ने जैसे ही अपनी गुमशुदा बेटियों को देखा—थाने में गूँज उठा भावुक स्वर: “आज पुलिस मेरे लिए भगवान है”

जबलपुर, यश भारत। गढ़ा थाना में बीते दिनों ऐसा मार्मिक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर इंसान के दिल को हिला दिया। एक माँ… जो पिछले कई दिनों से अपनी दो नाबालिग बेटियों की तलाश में दर–दर भटक रही थी, जब थाने पहुँची तो उसकी चीख-सिसकी पूरे परिसर में गूँज उठी। वह रोती जा रही थी, गिरती पड़ती थाने में पहुँची… और हर पुलिसकर्मी की आँखें नम हो गईं।यह महिला एक सिंगल मदर है, जो सरकारी विभाग में नौकरी करते हुए अकेले अपने घर की जिम्मेदारी उठाती है। दोनों बच्चियाँ ही उसकी दुनिया थीं—और जब वह अचानक गायब हो गईं, तो उसका आसमान जैसे टूट पड़ा।
“साहब, मेरी बेटियाँ ढूँढ दीजिए…” — माँ की रुलाई से काँप उठा थाना
थाना प्रभारी प्रसन्न शर्मा और उनकी टीम उसे संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उसका दर्द असहनीय था।
वह बार-बार जमीन पर बैठ जाती, रो पड़ती, हाथ जोड़कर कहती—“साहब, मेरी बेटियाँ ढूँढ दीजिए… मैं बर्बाद हो जाऊँगी…”थाने में मौजूद स्टाफ उसकी इस हालत को देखकर स्तब्ध था। पर थाना प्रभारी ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए भरोसा दिलाया—“आपकी बेटियाँ जरूर मिलेंगी… हम वादा करते हैं।”यह वाक्य उस टूट चुकी माँ के लिए जैसे जीवनरेखा बन गया।
पुलिस के गहन प्रयास—कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए पहुँचे दिल्ली तक
जैसे ही बच्चे गायब होने की रिपोर्ट दर्ज हुई, थाने की टीम तेजी से हर दिशा में जांच में जुट गई.जाँच आगे बढ़ती गई और अंत में सुराग दिल्ली तक पहुँच गया।तुरंत एक टीम भेजी गई और दिन–रात मेहनत के बाद दोनों नाबालिग बहनों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
माँ-बेटी का मिलन—थाने में रो पड़ा हर इंसान
जब पुलिस दोनों बच्चियों को लेकर थाने पहुँची तो वहाँ कुछ ऐसा हुआ जिसे शब्दों में बयान करना कठिन है।माँ ने जैसे ही अपनी बेटियों को देखा…वह जोर से चीखती हुई उनके पास भागी।उन्हें सीने से लगाए फूट-फूटकर रोने लगी।
।बच्चियाँ भी अपनी माँ को पकड़कर रो रही थीं।
थाने का हर कर्मचारी इस दृश्य को देखकर भावुक हो गया। कई पुलिसकर्मियों की आँखें भर आईं।
माँ ने हाथ जोड़कर कहा—
“आज पुलिस मेरे लिए भगवान है… मेरे बच्चे लौटा दिए… मेरी जिंदगी लौटा दी।”
बच्चियों ने बताया क्यों छोड़ा घर – “हम माँ को अकेले संघर्ष करता नहीं देख सकते थे”
जब पुलिस ने उनसे बात की, तो दोनों बहनों ने मासूमियत से बताया—वे अपनी माँ को अकेले काम करते देख बहुत परेशान हो जाती थीं।जल्दी नौकरी करके माँ का बोझ कम करना चाहती थीं।माँ ने उन्हें मना किया, जिससे घर में तनाव हुआ।
बिना समझ के वे दिल्ली काम तलाशने निकल गईं।उनका उद्देश्य गलत नहीं था, लेकिन तरीका खतरनाक और जोखिम भरा था।
गढ़ा थाना की बड़ी उपलब्धि: अब तक 18 नाबालिग बच्चियाँ दस्तयाब
यश भारत के द्वारा की गई पड़ताल में सामने आया कि—
वर्ष 2025 से अब तक गढ़ा थाना 18 नाबालिग बच्चियों को सुरक्षित दस्तयाब कर परिवार को सौंप चुका है।यह उपलब्धि साबित करती है कि—गढ़ा थाना टीम सिर्फ कानून लागू करने वाला तंत्र नहीं,बल्कि समाज की सुरक्षा और बच्चों की रक्षा में सबसे मजबूत ढाल है।
थाने का आँकड़ा (दस्तयाबी रिपोर्ट):
इस रिपोर्ट के अनुसार गढ़ा थाना क्षेत्र में वर्ष 2025 में दर्ज गुमशुदगी के 18 मामलों में सभी नाबालिगों को सुरक्षित दस्तयाब किया गया है। यह स्वयं में एक उल्लेखनीय कार्य है।
थाना प्रभारी प्रसन्न शर्मा का बयान
थाना प्रभारी प्रसन्न शर्मा ने कहा—“किसी माँ का दर्द हमसे अलग नहीं है। बच्चियाँ मिलना हमारा फर्ज नहीं—हमारी इंसानियत है। गढ़ा थाना हर पीड़ित के साथ खड़ा है। पुलिस पर भरोसा रखें, हम आपकी रक्षा और मदद के लिए हमेशा तैयार हैं।”
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि—जब वर्दी इंसानियत से काम करती है, तो टूटे परिवार भी फिर से बस जाते हैं।गढ़ा थाना की टीम ने न सिर्फ कानून का पालन किया बल्कि मानवता की उस मिसाल को जिंदा रखा, जो पुलिस की असली छवि है।







