जबलपुर के मनरेगा मजदूर कर्जदार, दिसंबर से नहीं मिली मजदूरी
गांवों से पलायन कर रहे लोग,योजना के काम भी अटके

जबलपुर यशभारत। केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के जबलपुर में बुरे हाल है। हाल ये बयां लगाया जा सकता है कि मनरेगा में काम करने वाले मजदूर अब कर्जदार हो गए हैं। मजदूरों को दिसंबर माह से मजदूरी नहीं मिली है। आश्यर्च की बात तो यह है कि तीन माह से मजदूरों के खातों में राशि नहीं है लेकिन जिम्मेदारी विभाग के अधिकारियों ने सुध तक नहीं ली।
15 हजार लोगों को काम मिला हुआ है
जिले की सातों जनपदों के अंतर्गत आने वाले ग्रामों में जो निर्माण कार्य चल रहे हैं, उनमें 15 हजार से अधिक लोगों को मनरेगा योजना में काम मिला हुआ था। जैसे ही राशि मिलनी बंद हुई, उन्होंने दूसरे काम करने शुरू कर दिए। बताया जाता है कि वर्तमान में सात हजार मजदूर ही काम कर पा रहे हैं। बाकी या तो अपनी खेती में जुट गए हैं या फिर बाहर जाकर मजदूरी कर रहे हैं। इसका सीधा असर अधोसंरचना के कामों पर पड़ रहा है।
रोजी रोटी का संकट, काम तलाश रहे मजदूर
योजना में भुगतान नहीं होने के कारण उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बीच में मटर की तुड़ाई हो रही थी, तब तक तो उनका काम चल गया लेकिन अब संकट गहराने लगा है। इसका असर क्षेत्रों में तालाब, सड़क और नालियों के अलावा भवनों के निर्माण पर पडऩे लगा है। यदि हालात यही रहे तो पलायन बढ़ सकता है।
204 रुपए है मजदूरी की दर
मनरेगा के तहत काम करने पर मजदूरों को 204 रुपए प्रतिदिन मजदूरी मिलती है। इसका भुगतान 22 दिसंबर के बाद से नहीं हो रहा है। ऐसे में कई श्रमिकों की शासन से लेनदारी हजारों रुपए हो गई है। ऐसे में 69 हजार 400 श्रमिक हैं जिन्हें 8 करोड 48 लाख रुपए की राशि का भुगतान किया जाना है। यह आंकड़ा बढ़ भी रहा है।







