माइनिंग माफिया की मनमानी: नियमों को ताक पर रखकर हाईवे पर चल रही मिनरल्स की खुदाई


जबलपुर, यश भारत। सिहोरा क्षेत्र में माइनिंग माफिया की मनमानी जोरों पर है, और जिम्मेदार आंख पर पट्टी बांधे हुए बैठे हुए हैं। जबलपुर- कटनी नेशनल हाईवे क्रमांक 30 पर गांधीग्राम के पास पटवारी हल्का नंबर 1714 में 5.18 हेक्टेयर की आयरन और मैंगनीज की खदान राज मिनरल्स के नाम से आवंटित की गई है जो की पूरी तरह से हाईवे से सटी हुई है। जबकि नियमों के मुताबिक नेशनल हाईवे से 100 मीटर की दूरी पर ही कोई भी उत्खनन गतिविधि संचालित नही हो सकती है, लेकिन यहां नेशनल हाईवे से सटकर ही खनन का काम किया जा रहा है। जहां हाईवे से सटकर लगभग 100 से 200 फिट गहरी खाई बना दी गई है, जो की दुर्घटनाओं को खुला आमंत्रण दे रही है।
यह कहता है नियम
नियम के अनुसार किसी भी नेशनल हाईवे से 100 मीटर की दूरी तक खनन का कार्य नहीं किया जा सकता है, और यदि पहले से माइंस उस क्षेत्र में स्वीकृत हो और उसके बाद वहां से नेशनल हाईवे निकाला गया हो तो भी उस जगह को लगभग 100 मीटर तक फिल किया जाएगा और 100 मीटर के दायरे में कोई भी मीनिंग गतिविधि संचालित नहीं हो सकती है। साथ ही साथ माइनिंग विभाग भी उक्त दायरे में कोई भी टी पी ( ट्रांजिट परमिट)जारी नहीं करेगा ।
दुर्घटनाओं को मिल रहा आमंत्रण
गांधीग्राम के राज मिनरल्स की खदान के मामले में गंभीर आनियमिताये सामने आ रही है । जहां खनन करता द्वारा हाईवे के किनारे प्रोफ़ाइल सीट (टीन) की दीवार खड़ी कर दी गई है। ताकि अंदर की तरफ कोई देख ना सके और उसके ठीक पीछे से खुदाई का कार्य किया जा रहा है। कहीं-कहीं तो गड्ढे 200 फीट से भी ज्यादा गहरे हैं। यदि कोई बस या ट्रक अनियंत्रित होकर इस खदान की ओर जाएगा तो फिर बहुत बड़ी दुर्घटना होगी लेकिन मोटी कमाई करने के लिए नियमों के साथ-साथ मानवीय मूल्यों से भी समझौता किया जा रहा है।
देवनगर से जुड़े हैं तार
यश भारत द्वारा पिछले दिनों देव नगर में पुष्पराज सिंह बघेल द्वारा मुरम खदान से लेटराइट निकलने का जो मामला उजागर किया था। उसके तार भी गांधीग्राम की इस आयरन और मैग्नीशि खदान से जुड़ रहे हैं। पिछले दिनों गोसलपुर थाने में जो हाईवा पकड़ा गया था उसकी बिल्टी पर जो ट्रक की जानकारी अंकित है वह राज मिनरल्स के पार्टनर पुष्पराज सिंह बघेल की है और गांधीग्राम की यह खदान भी राज मिनरल्स के नाम से है। जिसमें पुष्पराज सिंह बघेल पार्टनर है। जबकि यश भारत द्वारा पहले आशंका जहर की गई है कि मुरुम के नाम पर लेटराइट की खुदाई करके उसे किसी और खदान में डंप किया जा रहा है और फिर महंगे दामों पर बेचा जा रहा है। ऐसे में इस तरह के तार एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर संकेत करते हैं। जबकि दोनों ही खदानों से जुड़ा हुआ व्यक्ति सत्ता धारी दल में एक बड़े पद पर हैं। ऐसे में अधिकारी भी उनके आगे कहीं ना कहीं नतमस्तक नजर आ रहे हैं।







