भोपालमध्य प्रदेश

भोपाल में हुई महापौरों की बैठक: अवैध कॉलोनियों पर सख्त कानून की मांग

भोपाल में हुई महापौरों की बैठक: अवैध कॉलोनियों पर सख्त कानून की मांग
​भोपाल, यशभारत। मंगलवार देर रात भोपाल में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें प्रदेशभर के 14 महापौरों ने हिस्सा लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य महापौरों की समस्याओं को सीधे तौर पर सुनना और उनका समाधान निकालना था। बैठक में अवैध कॉलोनियों, प्रशासनिक पारदर्शिता, और नगरीय निकायों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

अवैध कॉलोनियां बड़ी मुसीबत बन जाएंगी
​बैठक में जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह ने अवैध कॉलोनियों के तेजी से फैलने पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अगर इन पर लगाम लगाने के लिए सख्त कानून नहीं बनाया गया, तो यह भविष्य में एक बड़ी समस्या बन जाएगी। उन्होंने बताया कि गरीब लोग सस्ते के लालच में इन कॉलोनियों में जमीन खरीद लेते हैं, लेकिन बाद में उन्हें मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलतीं, जिसकी जिम्मेदारी आखिर में निगम और सरकार पर आ जाती है। अन्य महापौरों ने भी इस मुद्दे पर कड़े कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया।

​महापौरों ने उठाईं अधिकारियों की शिकायतें
​बैठक में सिंगरौली की महापौर रानी अग्रवाल ने शिकायत की कि कई बार निगम आयुक्त उनकी बात नहीं सुनते, जिससे जनता के काम रुके रहते हैं। इस पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आश्वासन दिया कि अब हर 10 दिन में महापौर और निगम आयुक्तों की नियमित बैठकें कराई जाएंगी, ताकि समस्याओं का तुरंत हल निकाला जा सके।
​इसके अलावा, छिंदवाड़ा के महापौर विक्रम अहके ने मांग की कि नगर निगम क्षेत्र में राजस्व विभाग की जो जमीनें हैं, उनका स्वामित्व नगर निगम को दिया जाए, ताकि उनका उपयोग जनहित के कामों में हो सके। रतलाम के महापौर ने अमृत परियोजना के पहले चरण में हुए कामों की गुणवत्ता की जांच की मांग की, जबकि जबलपुर के महापौर ने कॉमर्शियल इमारतों पर लगने वाले आश्रय शुल्क को खत्म करने का सुझाव दिया।

​बैठक में लिए गए प्रमुख फैसले
​चर्चा के बाद, नगरीय प्रशासन विभाग ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए:
​चुंगी का पैसा निकायों को समय पर और पूरी तरह से मिलेगा।
​सभी नगर निगमों का एनर्जी ऑडिट (ऊर्जा ऑडिट) कराया जाएगा।
​हर हफ्ते महापौर-परिषद (MIC) की बैठकें अनिवार्य रूप से होंगी।
​शहर की सड़कों की गुणवत्ता की जांच के लिए राज्य-स्तरीय दल निरीक्षण करेगा।
​बिल्डिंग परमिशन (भवन अनुमति) प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा।
​डिजिटलाइजेशन और फेस अटेंडेंस सिस्टम लागू कर प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाई जाएगी।
​नगरीय निकायों में खाली पदों पर जल्द ही नियुक्तियां की जाएंगी।ो

 

 

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