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व्हीकल की सुरम्य पहाड़ी पर स्थित है मां महालक्ष्मी धाम

आस्था का केंद्र वर्ष 1995 में हुई थी स्थापना-राजेश शर्मा राजू

जबलपुर यश भारत। शहर की आपाधापी से दूर व्हीकल फैक्ट्री की पहाड़ियों पर जी एम बंगला के बाजू में स्थापित महालक्ष्मीधाम लोगों की अगाध आस्था का केंद्र है। इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1995 में तत्कालीन सीनियर जी एम वी आर शिवकुमार और पंडित रामस्वरूप शुक्ला के अथक प्रयासों के बाद संभव हो पाया था। तबसे लेकर आज तक फैक्ट्री के पूर्व और वर्तमान अधिकारी कर्मचारियों की इस मंदिर के प्रति अटूट आस्था है। किसी जमाने में जब फैक्ट्री के कर्मचारी यहां बहुततायत में रहते थै तू प्रतिदिन अपने परिवार के साथ मंदिर में पूजन और दर्शन के लिए आते थे।

मंदिर में स्थापित है अष्टधातु की प्रतिमा

शहर का यह एकमात्र महालक्ष्मी मंदिर है जहां पर अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित है। मुख्यतः तु या दूसरों का मंदिर है लेकिन यहां पर मां बगलामुखी और मां दुर्गा की प्रतिमाएं भी दाएं बाएं स्थापित हैं। मंदिर के मुख्य परिसर के बाहर विशालकाय शिवलिंग और नंदी की प्रतिमा के साथ ही एक और बजरंगबली का मंदिर भी है। जहां प्रतिदिन दर्शन पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

नैसर्गिक सौंदर्य से मिलती है आध्यात्मिक और मानसिक शांति

जो भी श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शनों के लिए आता है वह यहां के नए नैसर्गिक सौंदर्य को देखकर भी अभीभूत रह जाता है। पत्थर की बड़ी-बड़ी चट्टान और बड़ै-बड़े हरे भरे पेड़ महालक्ष्मीधाम के महात्मा मैं न केवल चार चांद लगाते हैं बल्कि प्रकृति की इस धरोहर के चलते यहां आने वाले भक्तों को आत्मिक शांति की अनुभूति भी होती है।

चारों नवरात्र पर होते हैं अनुष्ठान हवन और विशेष पूजन के कार्यक्रम

चैत्र और शारदेय नवरात्र के अलावा साल में पढ़ने वाली दो गुप्त नवरात्र पर भी यहां विविध धार्मिक अनुष्ठान हवन पूजन की कार्यक्रम आयोजित होते हैं। दीपावली के मौके पर भी विशेष पूजन अर्चन के कार्यक्रम इस साल भी आयोजित किए जाएंगे इस आशय की जानकारी वर्तमान में मंदिर की व्यवस्था संभाल रहे मुख्य पुजारी डीके शुक्ला के अनुसार प्रत्येक नवरात्र पर यहां विशाल भंडारा भी आयोजित होता है जिसमें दूर दराज के लोग भी शामिल होने के लिए आते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर निर्माण मै उनके पिता रामस्वरूप शुक्ला की भी उल्लेखनीय भूमिका रही है।

समय के साथ-साथ बदलता गया मंदिर का स्वरूप और आज भव्य मंदिर सामने है आज मंदिर का जो भव्य स्वरूप देख रहा है वह लोगों के सहयोग से ही संभव हो पाया है वर्तमान में भी जो फैक्ट्री प्रबंधन के अधिकारी कर्मचारी हैं उनका पूरा सहयोग मंदिर की व्यवस्थाओं के संचालन और यहां आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में मिलता है। क्षेत्रीय लोगों के लिए भी यह बड़ी आस्था का केंद्र है। प्रति शुक्रवार को यहां बड़ी संख्या में लोग विशेष पूजन अर्चन के लिए आते हैं। मंदिर तक पहुंचने के दो रास्ते हैं एक रास्ता सड़क मार्ग से मंदिर तक पहुंचता है तो दूसरा सीढ़ियां चढ़कर भक्तों को मंदिर तक पहुंचाने का माध्यम है।

व्हीकल क्षेत्र की अन्य मंदिर भी है आस्था के केंद्र

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व्हीकल क्षेत्र में स्थापित महालक्ष्मी धाम के अलावा बंग समाज का काली मंदिर दक्षिण भारतीयों का अय्यप्पा मंदिर हनुमान जी का लंगर महाराज मंदिर और शिव मंदिर भी इसी मंदिर की आस-पास थोड़ी-थोड़ी दूर पर स्थित है जो लोग महालक्ष्मी के दर्शन करने आते हैं के दर्शन करने आते हैं उनमें ऐसी बहुत से श्रद्धालु इन मंदिरों में भी दर्शन पूजन के लिए पहुंचते हैं |

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