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जीवनशैली में बदलाव ही है असली दवा, डॉ. परिमल स्वामी

Lifestyle change is the real medicine, Dr. Parimal Swami

जीवनशैली में बदलाव ही है असली दवा, डॉ. परिमल स्वामी

लाइफस्टाइल मेडिटेशन से डायबिटीज, बीपी, हार्ट और मानसिक रोगों पर पाया जा सकता है नियंत्रण

जबलपुर, यश भारत। प्रसिद्ध स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. परिमल स्वामी ने यश भारत न्यूज़ चैनल के प्राइम टाइम विद आशीष शुक्ला कार्यक्रम में कहा कि आज की अधिकांश बीमारियों का असली इलाज दवाओं में नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली में छिपा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग, अवसाद और कैंसर जैसी बीमारियों की जड़ हमारी दिनचर्या, खानपान, नींद और मानसिक स्थिति से जुड़ी हुई है। डॉ. स्वामी ने कहा कि यदि हम डाइट, एक्सरसाइज, डीप स्लीप और मानसिक प्रबंधन को अपनाएं, तो दवाइयों की आवश्यकता खुद-ब-खुद कम हो सकती है। उन्होंने इसे लाइफस्टाइल मेडिटेशन की संज्ञा दी।

उन्होंने कहा कि मेडिकल साइंस अब यह मान रही है कि लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों का समाधान केवल गोली-कैप्सूल में नहीं है। व्यक्ति अगर मोटा अनाज, हरी सब्जी, दाल और सलाद को भोजन में शामिल करे, रोजाना हल्की एक्सरसाइज करे और भरपूर नींद ले, तो न केवल बीमारियां घटेंगी, बल्कि दवाओं पर निर्भरता भी घटेगी। डॉ. स्वामी ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें। यदि जीवनशैली बेहतर की जाए, तो डॉक्टर की निगरानी में दवा की मात्रा कम की जा सकती है। उदाहरण के लिए, सामान्य ब्लड प्रेशर की सीमा 130/85 mmHg है। यदि यह स्तर केवल दवा से नहीं बल्कि जीवनशैली से नियंत्रित होता है, तो दवाओं की जरूरत घट सकती है।

उन्होंने युवाओं के लिए तीन बड़ी चुनौतियाँ गिनाईं —

 इम्यूनिटी की कमी, अनियमित खानपान, तनाव और प्रतिस्पर्धा के कारण बढ़ती मानसिक बीमारियाँ।

उन्होंने कहा कि यह सब मिलकर आज के समय में बच्चों और युवाओं को जल्दी बीमार बना रहा है। डॉ. स्वामी ने यह भी बताया कि पेट की चर्बी बीपी, डायबिटीज, हार्ट और लिवर रोगों की सबसे बड़ी जड़ है। बर्गर, मैदा और जंक फूड में छिपी शुगर और फैट इसके लिए ज़िम्मेदार है। सिर्फ मीठा खाना ही नहीं, बल्कि मैदा और तला-भुना भोजन भी शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ाता है उन्होंने कहा। मानसिक स्तर पर डॉ. स्वामी ने मेंटल मैनेजमेंट को बेहद ज़रूरी बताया।अगर हम मन से संकल्पित हो जाएं कि हमें स्वस्थ रहना है, तो वह आदतें खुद-ब-खुद बनती चली जाएंगी।

समापन में, डॉ. स्वामी ने कहा कि

बीमारी का सबसे सस्ता, सुरक्षित और प्रभावशाली इलाज हमारे भीतर ही है बस जीवनशैली को सजगता से अपनाने की जरूरत है।

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